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शनिवार, 17 सितंबर 2016

8:00:00 pm

BOTH SEX NEW BORN BABY:जन्मा विचित्र बच्चा: शरीर में स्त्री और पुरुष दोनों के अंग

जन्मा विचित्र बच्चा: शरीर में स्त्री और पुरुष दोनों के अंग

'THIINKOON' WHATS A LEVEL OF GOD SCIENCE

पटना। ऊपरवाले की माया भी बड़ी निराली है। इसके आगे मेेडिकल साइंस भी कई बार असहाय नजर आती है। ऐसा ही एक मामला बिहार के नवादा जिले में सामने आया है। यहां एक महिला के एक विचित्र बच्चे को जन्म दिया है। इस बच्चे के शरीर में स्त्री और पुरुष दोनों के अंग हैं। इस बच्चे को देखकर चिकित्सक भी हैरान है।

नवादा के पकरीबरावां थाना क्षेत्र के छतरवार गांव निवासी राजकुमार पासवान की पत्नी जानी देवी ने बच्चे को जन्म दिया। इस बच्चे के शरीर में स्त्री और पुरुष दोनों के अंग को देखर लोग हैरान रह गए।

इस बच्चे के परिजन उसे पकरीबरावां पीएचसी ले गए, जहां से चिकित्सकों ने उसे सदर अस्पताल रैफर कर दिया। नवादा सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने भी इस अजीबोगरीब बच्चे को देखकर पीएमसीएच भेज दिया।

परिजनों का कहना है कि बच्चे के अंग को देखर आम आदमी से लेकर डॉक्टर तक हैरान हैं। बच्चे के जन्म के बाद से ही अस्पताल परिसर में उसे देखने वालों की भीड़ जमा हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार देखा गया है कि कुदरत की गलती की वजह से ऐसे बच्चे जन्म लेते हैं, जिन्हें मेडिकल की भाषा में ग्लूड बेबी कहा जाता है।

7:52:00 pm

WORLD SMALLEST GIRL 227 GM: दुनिया की सबसे छोटी बच्ची इसका वज़न हैं कुल 227 ग्राम


दुनिया की सबसे छोटी बच्ची इसका वज़न हैं कुल 227 ग्राम

जर्मनी की एमीलिया दुनिया की सबसे छोटी और कम वजन की बच्ची मानी जा रही है। जन्म के समय इस बच्ची का वजन एक शिमला मिर्च जितना था. उसके पैर अंगूठे के बराबर थे और कुल लंबाई 22 सेंटीमीटर थी। डॉक्टर्स और परिवार ने उसकी देखरेख की, जिसके नौ माह बाद उसका वजन एक नवजात शिशु के बराबर का हुआ।

आज नौ माह की ये नन्हीं फाइटर गर्ल स्वस्थ है और अपने परिवार के साथ खुश भी है। लोकल रिपोर्ट्स के अनुसार एमीलिया जीवित रहने वाली विश्व की सबसे कम वजनी प्रीमेच्यॉर बेबी है। इससे पहले यह रिकॉर्ड रुमाइसा रहमान के नाम था। जन्म के वक्त उसका वजन 8.6 आउंस था, जबकि एमीलिया का वजन 8 आउंस था, यानी कि लगभग 227 ग्राम।


जर्मनी के सेंट मैरी हॉस्पिटल के गायनेकोलॉजिस्ट बहमन घारवी ने बताया कि, 14 आउंस का बच्चा भी बहुत मुश्किल से ही जीवित रह पाता है। हमें एमीलिया को भी धन्यवाद करना चाहिए, आखिर यह उसकी जीने की चाह ही तो है, जो वह आज जीवित है। अभी तक एमीलिया में डिसएबिलिटी के कोई साइन नजर नहीं आए हैं

7:48:00 pm

MALE MOTHER :आदमी ने बच्चें को दिया जन्म पिला रहा है अपना दूध

आदमी ने बच्चें को दिया जन्म पिला रहा है अपना दूध


क्या आपने कभी सोचा है की एक मर्द भी बच्चे को जन्म दे सकता है. लेकिन हम आपको एक ऐसा ही मामला बताने जा रहे है. यह मामला अमेरिका में सामने आया है. जहाँ एवं नाम के एक शख्स ने एक बच्चे को जन्म दिया है.

उनकी बहन जेस्सी हेम्पेल ने ट्विटर और टाइम की वेबसाइट पर आर्टिकल लिखकर बताया कि उनके भाई ने बच्चे को जन्म दिया और अब वह उसको अपना दूध पिलाकर पाल रहे हैं। जेस्सी ने इसकी एक तस्वीर भी ट्विटर पर पोस्ट की। वहीँ उनकी बहन जेस्सी हेम्पेल ने ट्विटर पर भाई की फोटो पोस्ट करते हुए लिखा, ‘इवान की प्रेगनेंसी इस बात का सबूत है कि हम एक अद्भुत युग में जी रहे हैं।

19 साल की उम्र में उन्होंने हार्मोन ट्रीटमेंट करवाया जिसके बाद वह मर्द बन गए। लेकिन उन्होंने अपने महिला जननांग और ब्रेस्ट को रहने दिया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह अपना बच्चा चाहते थे और उसे दूध पिलाने की जरुरत पड़ सकती थी। वहीँ इवान ने कहा कि मां बनने का उनका अनुभव काफी पॉजिटीव रहा। वह कहते हैं, ‘यह एक तरह से जुआ था। मैं नहीं जानता था कि मैं कैसा फील करूंगा। लेकिन जब यह सबकुछ हुआ तो मुझे लगा कि हां, मेरा शरीर यह सब कर सकता है।’


7:40:00 pm

इस राजा की हैं 60 बीवियां, खाना म्यांमार में खाता है, सोने के लिए रोज आता है भारत

इस राजा की हैं 60 बीवियां, खाना म्यांमार में खाता है, सोने के लिए रोज आता है भारत

नई दिल्ली। आज के समय में भी एक राज की 60 बीवियां है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि यह राजा रोज खाना तो म्यांमार में खाता है, लेकिन सोने के लिए भारत आता है, वह भी बिना कोई फ्लाइट पकड़े। दरअसल यह कहानी नागालैंड के लोंगवा गांव की है। यहां कोन्याक जनजाति के लोग रहते हैं और इस गांव का आधा हिस्सा भारत में है, जबकि आधा म्यांमार में है। यहां के लोग बिना वीजा-पासपोर्ट के भारत और म्यांमार में आते जाते हैं।

बता दें कि इस ट्राइब के राजा का नाम अंग नगोवांग है। इस राजा के अधीन लोंगवा समेत कुल 75 गांव आते हैं। वहीं इनके घर के बीच से होकर म्यांमार और भारत का बॉर्डर गुजरता है। ऐसे में इनका परिवार खाता तो म्यांमार के हिस्से में खाता है और सोने के लिए भारतीय सीमा का उपयोग करता है। बता दें कि लोंगवा गांव के राजा का परिवार काफी बड़ा है। इसमें उनकी 60 बीवियां शामिल हैं और राजा का बेटा म्यांमार आर्मी में है।

भारत-म्यांमार सीमा पर होने के कारण यहां के लोगों को तकनीकी तौर पर दोनों ही देशों की नागरिकता मिली हुई है। ऐसे में इन्हें म्यांमार जाने के लिए न तो वीजा की जरूरत होती है और न ही भारतीय पासपोर्ट की। यहां के लोग दोनों ही देशों में स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं।

इस ट्राइब के लोगों को हेड हंटर्स के नाम से भी जाना जाता है। पहले ये लोग इंसानों को मारकर उसके सिर को साथ ले जाते थे। हालांकि 1960 के दशक बाद यहां हेड हंटिंग नहीं होती है, लेकिन लोगों के घरों में सजाई गई खोपडिय़ों को देखा जा सकता है।

11:11:00 am

हैरान परेशानः एक ही पेड़ पर लगते हैं 40 तरह के फल

हैरान परेशानः एक ही पेड़ पर लगते हैं 40 तरह के फल

फलों को सेहतमंद रखने का नुस्खा माना जाता है। लेकिन क्या कभी आपने ऐसे पेड़ के बारे में सुना है, जिसमें 40 तरह के अलग-अलग फल लगते हों। यकीन मानिए ये कोई मजाक नहीं है। जानिए कहां है ये पेड़ जिससे आप 40 तरह के फल खा सकते हैं।

अमेरिका में एक विजुअल आर्टस के प्रोफेसर ने अद्भुत पौधा तैयार किया है। 40 प्रकार के फल देने वाला यह पौधा 'ट्री ऑफ 40' नाम से मशहूर है। इसमें बेर, सतालू, खुबानी, चेरी और नेक्टराइन जैसे कई फल लगते हैं।

इस पेड़ की कीमत आपके होश उड़ाने के लिए काफी है

अमेरिका की सेराक्यूज यूनिवर्सिटी में विजुअल आर्ट्स के प्रफेसर वॉन ऐकेन ने इस पेड़ को तैयार किया है जिसकी करीब 19 लाख रुपए है। इसका काम 2008 में उस समय शुरू हुआ जब वॉन ऐकेन ने न्यू यॉर्क स्टेट ऐग्रिकल्चरल एक्सपेरिमेंट में एक बगीचे को देखा जिसमें 200 तरह के बेर और खुबानी के पौधे थे। ये बगीचा फंड की कमी से बंद होने वाला था।

इस बगीचे में कई प्राचीन और दुर्गम पौधों की प्रजातियां भी थी। वॉन का जन्म खेती से संबंधित परिवार में होने के कारण खेती-बाड़ी में उनको हमेशा दिलचस्पी रही। उन्होंने इस बागीचे को लीज पर ले लिया और ग्राफ्टिंग तकनीक की मदद से उन्होंने ट्री ऑफ 40 जैसे अद्भुत कारनामे को अंजाम दिया।

ग्राफ्टिंग तकनीक के तहत पौधा तैयार करने के लिए सर्दियों में पेड़ की एक टहनी कली समेत काटकर अलग कर ली जाती है। इसके बाद इस टहनी को मुख्य पेड़ में छेद करके लगा दिया जाता है। जुड़े हुए स्थान पर पोषक तत्वों का लेप लगाकर सर्दी भर के लिए पट्टी बांध दी जाती है। इसके बाद टहनी धीरे–धीरे मुख्य पेड़ से जुड़ जाती है और उसमें फल–फूल आने लगते हैं।

11:08:00 am

इस ज्यूस से सिर्फ 42 दिनों में ख़त्म होगा कैंसर, अब तक 45000 लोग हो चुके है पूरी तरह ठीक। शेयर जरूर करे

इस ज्यूस से सिर्फ 42 दिनों में ख़त्म होगा कैंसर, अब तक 45000 लोग हो चुके है पूरी तरह ठीक। शेयर जरूर करे

इस प्रसिद्ध ऑस्ट्रियाई रस ने कैंसर और अन्य असाध्य रोगों से 45,000 से अधिक लोगों को ठीक किया है :एक विशेष भोजन की मौजूदा जो 42 दिनों के लिए रहता है का आविष्कार किया। रुडोल्फ सिफारिश की है कि सभी लोगों को सिर्फ चाय और इस सब्जी का रस पीना चाहिए।इस अद्भुत घर का बना रस में मुख्य घटक चुकंदर है । उनका दावा है कि इस चक्र के दौरान , कैंसर की कोशिका मर जाते हैं।नोट : सुनिश्चित करें कि आप जैविक या स्थानीय उगाई सब्जियों का उपयोग करते हैं।
आप निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगी :चुकंदर (55 %),गाजर (20 %),अजवाइन रूट (20 %),आलू (3%),मूली (2 %) [इनका जूस बनाएं, अपने ड्रिंक का आनंद लें।]
नोट : इस जुस को जादा मात्रा में न पिये, अपने शारीरिक आवश्यकता के अनुसार ही पिये।ऑस्ट्रिया के रुडोल्फ Breuss ने कैंसर के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक इलाज खोजने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया है। Rudolf Breuss ने बताया के कैंसर ठोस भोजन पर ही जिंदा रहता है , कैंसर को बढ़ने से रोका जा सकता है अगर कैंसर का मरीज़ 42 दिन तक सिर्फ सब्जिओं का रस और चाय ही ले |Rudolf Breuss ने एक ख़ास जूस तयार किया जिसके बहुत ही शानदार नतीजे देखने को मिले , उन्होंने इस तरीके से 45,000 से भी ज़यादा लोग जिन्हें कैंसर या कई इसी लाइलाज बीमारियाँ थी को ठीक किया | ब्रोज्स का कहना था के कैंसर सिर्फ प्रोटीन पर ही जिंदा रहता है
breuss का कैंसर को ठीक करने का ये तरीका 42 दिन तक चलता है , कियोंके कैंसर के सेल्स का मेटाबोलिज्म हमारे शारीर में मोजूद बाकी सेल्स से अलग होता है , breuss का ये ख़ास किसम का रस इस तरीके से तयार किया गया है जिस से कैंसर के सेल्स तक कोई ठोस प्रोटीन युक्त भोजन ना पहुच सके और कोई खुराक न मिलने के कारण उसके सेल्स अपने आप ख़त्म हो जाएँ परन्तु ये रस शारीर के बाकि सेल्स को कोई नुकसान नही पहुचाता |

इन 42 दिनों के दौरान सभी कच्चे फल और सब्जियां तरल रूप में दिए जाते हैं | breuss ने इस बात पर ख़ास जोर दिया है के कैंसर के मरीज़ को 42 दिनों के लिए सिर्फ रस और चाय हे दी जाये इसके इलावा कोई भी ठोस चीज़ खाने के लिए नही दी जाये | इस दौरान इस्तेमाल की जाने वाली सब्जियां कुदरती (organic ) तरीके से उगाइ गई हों और अच्छे से साफ की गई हों |कियोंकि कैंसर के सेल ठोस खाने में पाए जाने वाले प्रोटीन पर ही जिंदा रहते हैं तो अगर आप 42 दिनों के लिए कुछ भी ठोस नही खायेंगे और सिर्फ जूस और चाय ही लेंगे तो कैंसर के cell अपने आप ख़तम हो जायेंगे और शारीर के normal cell उसी तरह रहेंगे |कच्चे फल और सब्जिओं का रस हमेशा से बहुत सारी बिमारिओं के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है | विज्ञानं ने भी ये साबित किया है के कच्चे फल और सब्जिओं में anti oxidatns और कई ऐसे तत्व पाए जाते है जिनका हमारे भोजन में शामिल होना बहुत ज़रूरी है ता के हम आज कल के वातावरण में खुद को खतरनाक बिमारिओं से बचा सकें

इस ख़ास जूस में इस्तेमाल होने वाले फल और सब्जियां :

1 चुकंदर (beet root)1 गाजर (carrot)1/2 आलू (potato)1 मूली (radish)1 अजवायन के पोदे की डंडी (celery stick)ध्यान दे : सभी चीजें organic होनी चाहेये |सभी चीज़ों को जूसर में डाल कर अच्छे से रस निकाल लें और इसे छान लें ता के कोई भी ठोस चीज़ उस में न जाएँ | गिलास में डाल कर इसे ताज़ा पीयें |

 

 

 

11:00:00 am

जब ऐसा महसूस हो तो समझना आसपास है कोई आत्मा

जब ऐसा महसूस हो तो समझना आसपास है कोई आत्मा

भूत-प्रेतों की कहानियों से अक्सर कई लोग खौफ खा जाते हैं तो कई लोग इसे अफवाह बताकर खारिज कर देते हैं। हालांकि कुछ लोगों का तर्क रहता है कि जैसे दिन है तो रात भी है।
काला है तो सफेद भी है, उसी प्रकार यदि दुनिया में ईश्वर है तो भूत प्रेत भी अवश्य होंगे। लेकिन अक्सर ये भी सवाल उठते हैं कि आखिर भूत-प्रेत या आत्माएं हैं तो फिर दिखाई क्यों नहीं देती है।
दरअसल जिस प्रकार हम ईश्वर को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख पाते हैं, उसी प्रकार भूत-प्रेत या आत्मा को भी नहीं देख पाते हैं। इसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। आईये जानते हैं, कुछ ऐसे सिग्नल के बारे में, जो ये दर्शाते हैं कि आसपास ही कोई आत्मा है।
- आध्यात्मिक गुरुओं और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि आत्माओं का इलेक्ट्रिसिटी पर नियंत्रण होता है। जब कभी ऐसा लगे कि आपका नया बल्ब अजीबोगरीब तरीके से जलने व बुझने लगता है, तो यह किसी आत्मा की मौजूदगी का प्रमाण हो सकता हैl
- जब कोई घड़ी निश्चित समय पर ही बार-बार रूकने लग जाए तो इसका ये मतलब हो सकता है कि इन्सान की आत्मा उस समय पर कुछ कहना चाहती है।
- अगर आपके कमरे में अचानक बेवजह ठंड बढ़ जाए और आपके शरीर का तापमान गिरने लगे तो समझ जाए कि आपके अलावा वहां और भी कोई है।
- अगर आपको कहीं घूमते हुए सुनसान जगह पर अचानक सेंट की खुशबू आने लगे, तो यह आत्माओं की मौजूदगी का संकेत है।

- कुछ लोगों को उनके मरे हुए रिश्तेदार या नज़दीकी दोस्तों के चेहरे दिखाई देते रहते हैं। इसका मतलब है कि वो संपर्क स्थापित करना चाहते हैं।
- कई बार हमें ऐसा अहसास होता है कि कोई छू रहा है, दरअसल ये किसी करीबी के पास होने का अहसास होता है, जो अब दुनिया में नहीं है
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7:43:00 am

Cancer tablet :कैंसर के मरीजों के लिए वरदान है ये फल, कीमोथेरेपी से है 10 हज़ार गुना अधिक प्रभावशाली

कैंसर के मरीजों के लिए वरदान है ये फल, कीमोथेरेपी से है 10 हज़ार गुना अधिक प्रभावशाली

    

ग्रेविओला जिसे हिंदी में रामफल कहते है, ज्यादातर अफ्रीका , दक्षिण अमेरिका और दक्षिणपूर्व एशिया के बरसाती जंगलों में पाया जाता है. कुछ साल पहले जब इसके बारे में नए रिसर्च किये गए तो पता चला की इसके रस में कई ऐसे तत्व होते है जो कैंसर का इलाज करने में काम आ सकता है. यह तत्व यकृत और स्तन कैंसर के कीटाणुओं को मारने की क्षमता रखतें है.यह शरीफे की तरह दिखने वाला फल भारत के कई इलाकों में भी मिलता है जैसे हैदराबाद जो तेलंगाना की राजधानी है. यहाँ की भाषा “तेलुगु” में भी इसे रामफल ही कहतें हैं. क्या रामफल सचमुच कैंसर को मारने की क्षमता रखता है. चलिये देखते है की इस खट्टे फल की क्या क्या खास बातें है और ये कैसे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है.


ग्रेविओला या रामफल मिलता कहाँ है ?

रामफल का पेड़ एक सदाबहार पेड़ है जो क्यूबा, मध्य अमेरिका, मैक्सिको, कोलंबिया, ब्राजील, पेरू, वेनेजुएला और अन्य अमेज़न के वर्षावन क्षेत्रों में पाया जाता है. यह फल लाखों कैंसर के रोगियों के लोगों के साथ-साथ उनके डॉक्टरों के लिए आशा की एक किरण के रूप में आता है। इसका वैज्ञानिक नाम एनोना मुरिकाता है, और इस फल को कैंसर के प्राकृतिक इलाज के रूप में पूरे समुदाय के लिए एक भगवान का उपहार माना जा सकता है। वैसे कई परिक्षण किए गए हैं लेकिन इसे कैंसर के लिए एक सिद्ध उपचार के रूप में घोषित करने से पहले बहुत और परिक्षण करने की जरूरत है. अभी तक के रिसर्च से ये माना जा रहा है के ये फल कैंसर के इलाज़ में काफी कारगर हो सकता है। ग्रेविओला , पत्ते, पाउडर, कैप्सूल के रूप में और यहां तक कि तरल रूपों में विभिन्न रूपों में उपलब्ध है

ग्रेविओला- एक फल अलग-अलग नाम-ग्रेविओला के समानार्थी शब्द

स्पेनिश लोग इसे “गुआनबाणा ” फल कहते हैं। पुर्तगाली “ग्रेविओला ” कहते हैं। ब्राजीलियाई ऐसे गंदा, गुयाबानो, करोसोलिएर , गुआनावाना , टोगे बांरेिसि , डूरियन बंगला , नंगका ब्लॉन्डा , सिर्सक , और नंगका लोंडा के रूप में अलग-अलग नामों से बुलाते हैं । दक्षिण भारतीय राज्य केरल में, यह बस कांटों के साथ शरीफा,या “मुल्लथा ” के रूप में जाना जाता है। अन्य भारतीय क्षेत्रों में, यह शूल -राम-फल और हनुमान फल के रूप में जाना जाता है।यह बड़े फल आकार का एक खट्टा फल है । यह कच्चा खाया जाता है और इसके गूदे या रस का शर्बत तैयार करने में भी उपयोग हो सकता है. इस फल केकैंसर रोधक गुण उल्लेखनीय हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, यह एक नियमितकीमोथेरेपी से दस हजार गुना अधिक प्रभावी हो सकता है।

ग्रेविओला के स्वास्थ्य लाभ और कुछ सामान्य गुण

इससे भी बड़ी बात ये है कि यह एक प्राकृतिक फलों का रस है, इसलिए किसी भी तरह का साइड इफ़ेक्ट नहीं होता ।वैसे ग्रेविओला कई तरह के इलाज में उपयोग किया जाता है, यह मुखयतः अपने कैंसर विरोधी प्रभाव के लिए बहुत लोकप्रिय हो गया हैपेट के कीड़े और परजीवी इस फल से स्वाभाविक रूप से मारे जाते हैइसमें कोई शक नहीं कि ग्रेविओला कैंसर की रोकथाम का काम करता हैग्रेविओला उच्च रक्तचाप के प्रबंधन और उपचार में भी प्रयोग किया जाता हैअपने एंटीबायोटिक या माइक्रोबियल विरोधी गुणों के कारण ग्रेविओला फंगल संक्रमण से लड़ने में अद्भुत काम करता हैतनाव, अवसाद और तंत्रिका संबंधी विकार से पीड़ित लोगों को इस फल लेने के बाद सकारात्मक परिणाम दिखाई दिए हैग्रेविओला पेड़ कहीं भी आसानी से उगाया जा सकता है जैसे हैदराबाद और कई दूसरे जगहों पर


ग्रेविओला के औषधीय गुण

इसकी पत्तियां कैंसर कोशिकाओं को मारने में समान रूप से प्रभावी हैं ।यह कैंसर की कोशिकाओं को मारता है और एक प्राकृतिक चिकित्साके रूप में प्रभावी है ।जो इस फल का उपयोग करता है, उसका समग्र दृष्टिकोण में सुधार आता हैं ।यह पेड़ और इसके हिस्से कई घातक संक्रमण के खिलाफ काम करतें है ।केमो चिकित्सा के विपरीत इससे वजन घटना, बालों का झरना और मतली जैसे में कोई साइड इफेक्ट नहीं है ।चाहे उपचार कितने दिन भी चले , आप हमेशा मजबूत और स्वस्थमहसूस करते हैं ।ग्रेविओला का रस एक प्रतिरक्षा प्रणाली बूस्टर और रक्षक का काम करता है ।

ग्रेविओला पेड़ के रस का लाभ

इसका रस पेट के कैंसर, स्तन कैंसर, प्रोस्ट्रेट कैंसर, अग्नाशय के कैंसर और फेफड़ों के कैंसर कोशिकाओं को मारता है कैंसर कोशिकाओं को मारने के क्रम में यह स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं करता है

ग्रेविओला के अन्य औषधीय उपयोग

ग्रेविओला पेड़ की छाल, जड़ और यहां तक कि फल के बीज विभिन्न स्वास्थ्य के मुद्दों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया गया है, जैसे :

खराब लिवरदमादिल के रोगगठिया और जोड़ों से संबंधित बीमारियों

गुरुवार, 15 सितंबर 2016

7:37:00 pm

Forehead lines reading in Hindi


Forehead lines reading in Hindi

  रेखाएं सिर्फ मनुष्य के हाथों पर ही नहीं बल्कि मस्तक यानी माथे पर भी होती हैं। माथे की ये रेखाएं विभिन्न ग्रहों से प्रभावित होती हैं। शरीर लक्षण विज्ञान के अनुसार मस्तक की इन रेखाओं को देखकर व्यक्ति के भूत, भविष्य, वर्तमान व स्वभाव के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए व्यक्ति के मस्तक की स्थिति, आकार-प्रकार, रंग तथा चिकनाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। जानिए मस्तक पर कौन-कौन सी रेखाएं होती हैं व उनका किसी व्यक्ति के स्वभाव पर क्या प्रभाव पड़ता है-

शनि रेखा

इस रेखा का स्थान मस्तक में सबसे ऊपर होता है। यह रेखा अधिक लंबी नहीं होती, केवल मस्तक के मध्य भाग में ही दिखाई देती है। समुद्र लक्षण विज्ञान के अनुसार इस रेखा के आस-पास का भाग शनि ग्रह से प्रभावित माना जाता है। जिसके मस्तक पर यह रेखा स्पष्ट दिखाई देती है, वह गंभीर स्वभाव का होता है। यदि एक उन्नत मस्तक (थोड़ा उठा हुआ) पर शनि रेखा हो तो ऐसे लोग रहस्यमयी, गंभीर व थोड़े अंहकारी होते हैं। इनके बारे में अधिक जानकारी बहुत कम लोगों के पास होती है। ये सफल जादूगर, ज्योतिर्विद या तांत्रिक हो सकते हैं।

बृहस्पति (गुरु) रेखा

मस्तक पर शनि रेखा से थोड़ी नीचे गुरु रेखा का स्थान होता है। यह रेखा आमतौर पर शनि रेखा की तुलना में थोड़ी लंबी होती है। यह रेखा पढ़ाई, विचार, अध्यात्म, इतिहास संबंधी रुचि एवं महत्वाकांक्षा आदि की सूचक होती है। जिस व्यक्ति के मस्तक पर यह रेखा लंबी एवं स्पष्ट दिखाई देती है, वह आत्मविश्वासी व अपनी बात का पक्का होता है। ऐसे लोगों पर आंख मूंद कर विश्वास किया जा सकता है। ऐसे लोग सरकारी नौकरी या शिक्षा के क्षेत्र में अपना नाम कमाते हैं।

मंगल रेखा

मस्तक के बीच में कुछ ऊपर एवं गुरु रेखा के नीचे मंगल रेखा होती है। इस रेखा की प्रवृत्ति को समझने से पूर्व व्यक्ति के दोनों कानों के ठीक ऊपर के स्थानों तथा उससे कुछ आगे कनपटियों के ठीक ऊपर के स्थानों को भी देखना चाहिए। यदि एक सपाट या उन्नत मस्तक पर मंगल रेखा अपने शुभ गुणों के साथ हो और व्यक्ति के कनपटी से ऊपर के स्थान थोड़े उठे हुए हों तो ऐसा व्यक्ति साहसी, स्वाभिमानी, वीर, धर्मालु, दूरदृष्टि रखने वाला, समझदार एवं रचनात्मक प्रवृत्ति का होता है। ऐसे लोग किसी प्रशासनिक पद पर, सेना या पुलिस के अधिकारी अथवा राजदूत हो सकते हैं। लेकिन यदि एक निम्न या संकुचित मस्तक पर अशुभ गुणों से युक्त मंगल रेखा हो और कनपटी के ऊपर के भाग भी उन्नत हों तो ऐसा व्यक्ति अपराधी प्रवृत्ति का होता है। ऐसे लोगों को बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है और वे किसी के साथ कुछ भी कर बैठते हैं।

बुध रेखा

इस रेखा का स्थान लगभग मस्तक के बीच में होता है। यह रेखा लंबी होती है और कभी-कभी तो व्यक्ति की दोनों कनपटियों के किनारों को स्पर्श करती हुई दिखाई देती है। बुध रेखा व्यक्ति की याददाश्त, अन्य विषयों में उसका ज्ञान, सूझ-बूझ एवं ईमानदारी की सूचक होती है। यदि यह रेखा शुभ गुणों से युक्त हो तो ऐसा व्यक्ति तेज याददाश्त वाला, कलात्मक कामों में रुचि लेने वाला, सही-गलत की सोच रखने वाला, उच्च मानसिक क्षमता वाला व पारखी प्रवृत्ति का होता है। ऐसे लोगों में किसी भी इंसान को पहचानने की क्षमता सामान्य तौर पर अधिक होती है।

शुक्र रेखा

इस रेखा का स्थान बुध रेखा के ठीक नीचे केवल मध्य भाग में होता है। यह रेखा आमतौर पर छोटे आकार की होती है। यह रेखा उत्तम स्वास्थ्य, भ्रमण प्रवृत्ति, आकर्षक एवं सम्मोहक व्यक्तित्व की सूचक होती है। उन्नत मस्तक पर यदि यह रेखा स्पष्ट रूप से दिखाई दे तो ऐसा व्यक्ति स्फूर्ति, आशा व उत्साह से भरा रहता है। ऐसे व्यक्ति उच्च जीवन शक्ति से युक्त, घूमने-फिरने वाले, सौंदर्य प्रेमी एवं जरूरी मुद्दों पर गंभीर होते हैं। ऐसे लोग स्वच्छ, साफ तथा सफेद रंग अधिक पसंद करते हैं।

सूर्य रेखा

इस रेखा का स्थान मनुष्य की दाईं आंख की भौंह के ऊपर होता है। यह रेखा अधिक लंबी नहीं होती, सिर्फ आंख के ऊपर सीमित होती है। यह रेखा प्रतिभा, मौलिकता, सफलता, यश तथा समृद्धि की प्रतीक होती है। यदि यह रेखा शुभ गुणों से युक्त हो तो ऐसे व्यक्ति में अद्भुत सूझबूझ होती है। ऐसे लोग अनुशासन में रहना पसंद करते हैं। ये लोग अच्छे गणितज्ञ, शासक या नेता हो सकते हैं। ये अपने सिद्धांतों तथा व्यवहार से लोगों को बहुत जल्दी प्रभावित कर लेते हैं।

चंद्र रेखा

यह रेखा बांई आंख की भौंह के ऊपर होती है। यदि यह रेखा सरल, सीधी व स्पष्ट हो तो ऐसा व्यक्ति कलाप्रेमी, एकांतप्रिय, विकसित बुद्धि वाला तथा कल्पनाशील होता है। इनकी रुचि चित्रकला, गायन, संगीत आदि क्षेत्रों में होती है। कभी-कभी ऐसी रेखा वाले लोग आध्यात्म प्रिय सिद्ध एवं दूरदृष्टि वाले होते हैं।

7:33:00 pm

आइए जानते है, क्यों इन सातों पर हमेशा विश्वास करना चाहिए

आइए जानते है, क्यों इन सातों पर हमेशा विश्वास करना चाहिए-
1. देवता
लोगों में देवी और देवताओं को लेकर दो तरह की सोच पाई जाती है- आस्तिक और नास्तिक। जो लोग देव भक्ति में विश्वास रखते हैं, उन्हें आस्तिक कहा जाता है और जो भगवान में विश्वार नहीं रखते उन्हें नास्तिक। कई बार हमारा कोई काम या मनोकामना पूरी न होने पर हम भगवान पर विश्वास करना छोड़ देते हैं। उन पर से हमारी आस्था खत्म हो जाती है। जो लोग देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखते हैं, उन्हें अपनी सोच के मुताबिक ही फल मिलता है। आज हमें परेशानियों का सामना क्यों न करना पड़ रहा हो, लेकिन भगवान के प्रति आस्था रखने पर हमें उसका शुभ परिणाम जरूर मिलेगा। इसलिए भगवान के प्रति हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिए।
2. तीर्थ
तीर्थ स्थानों में खुद भगवान का निवास माना जाता है। तीर्थ स्थानों पर लगभग हर समय भक्तों की भीड़ लगी रहती है, जिसकी वजह से वहां कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ जाता है। ऐसे में कभी-कभी तीर्थों के प्रति मनुष्य की भावना नकारात्मक हो जाती है। ऐसी भावना के साथ तीर्थ की यात्रा करने पर भी मनुष्य को उसका पुण्य नहीं मिलता है। यदि उस तीर्थ के प्रति मनुष्य की भावना अच्छी न रहे तो पूरे विधि-विधान से तीर्थ-दर्शन करने पर भी उसका फल नहीं मिलता। इसलिए तीर्थों के लिए मन में हमेशा ही अच्छी भावना रखनी चाहिए।
3. ब्राह्मण
शास्त्रों में ब्राह्मणों का बहुत महत्व बताया गया है। किसी भी शुभ काम में ब्राह्मणों की पूजा करने और उन्हें दान देने का भी परंपरा है। परंपराओं का पालन तो हर कोई करता है, लेकिन बहुत ही कम लोग इसे पूरा सम्मान और आदर देते हैं। जो मनुष्य ब्राह्मणों पर विश्वास नहीं करता या उनके लिए अच्छी भावना नहीं रखता, उसे कभी भी अपने दान कर्मों का फल नहीं मिलता है। इसलिए मनुष्य को कभी भी श्रेष्ठ और योग्य ब्राह्मणों की योग्यता पर अविश्वास नहीं करना चाहिए।
4. मंत्र
मंत्रों को देवी-देवताओं के करीब पहुंचने के एक आसान तरीका माना जाता है। जो लोग रोज शांत मन और पवित्र भावनाओं से भगवान के मंत्रों का जाप करते हैं, उनकी सारी परेशानियों का हल निश्चित ही होता जाता है। जो मनुष्य घर वालों के दबाव में बिना मन से या मंत्रों में अविश्वास की भावना के साथ उनका उच्चारण करता है, उसे इनका साकारात्मक फल नहीं मिलता। इसलिए मंत्रों का पाठ हमेशा विश्वास और आस्था के साथ करना चाहिए।
5. ज्योतिषी
ग्रहों की दशाओं को देख कर मनुष्य के कुंडली दोष और समस्याओं के समाधान बताने वाले ज्ञाता व्यक्ति को ज्योतिषी कहा जाता है। कई लोग अपनी परेशानियों का हल पाने के लिए ज्योतिषियों और पंडितों के पास जाते हैं। कई लोग किसी और के कहने पर या ज्योतिषी पर भरोसा न होने पर भी उनके पास चले जाते है। ऐसे में मनुष्य चाहे कितने ही उपाय क्यों न कर ले, लेकिन उसकी परेशानी का हल नहीं निकलता है। मनुष्य जैसी भावना के साथ यह काम करता है, उसी वैसा ही फल मिलता है।
6. चिकित्सक
कहते हैं बड़े से बड़े रोग का इलाज किया जा सकता है, जरूरत है तो केवल विश्वास रखने की। औषध यानी चिकित्सक या डाक्टर। कई बार लोगों के कहने पर या किसी भी अन्य कारण से कुछ डाक्टरों या चिकित्सकों को लेकर हमारी सोच नकारात्मक हो जाती है। ऐसे में उस डाक्टर से हम कितना भी इलाज करवा लें लेकिन हमें उसका कोई असर नहीं होता। यदि हमें अपने रोग से छुटकाना पाना है तो अपने चिकित्सक पर विश्वार करें।
7. गुरु
जीवन में सफलता पाने के लिए एक श्रेष्ठ गुरु का होना बहुत जरूरी माना गया है। गुरु ही मनुष्य को सही और गलत में फर्क करना और उसकी जिम्मेदारियों का पालन करना सिखाता है। जो व्यक्ति अपने गुरु पर या उसकी दी गई शिक्षा पर विश्वास नहीं रखता, उसे जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अगर पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ गुरु और उसकी शिक्षा का पालन किया जाए तो जीवन में हर सफलता पाई जा सकती है। यदि गुरु की दी गई शिक्षा पर भरोसा न किया जाए तो हमारी सोच के जैसा ही फल भोगना पड़ता है।
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