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रविवार, 11 दिसंबर 2016

11:35:00 am

यदि परिवार में कोई अक्सर बीमार होता हैं तो करें वास्‍तु के ये उपाय

यदि परिवार में कोई अक्सर बीमार होता हैं तो करें वास्‍तु के ये उपाय


अगर आपके घर में बच्चे और बड़े अक्सर बीमार रहते हैं तो इसका कारण ये बातें हो सकती हैं। सुनने में ये बातें बहुत ही सामान्य लगती है, लेकिन यही आपकी परेशानी का कारण हो सकती हैं। घर के लोगों का स्वास्थ्य हमेशा अच्छा बनाए रखने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें-




 1. घर के के सामने पेड़ या खंभा होने से घर के बच्चों का स्वास्थय ज्यादातर खराब रहता है। अगर आपके घर के सामने भी पेड़ या खंभा है तो इस वास्तु दोष से बचने के लिए घर के मेन गेट पर रोज स्वस्तिक बनाएं।
2. मेन गेट के सामने गढ्डा हो तो पारिवारिक सदस्यों को मानसिक रोग और तनाव घेरे रहता हैं। इससे बचने के लिए उस गढ्डे को मिट्टी से भर दें।
3. मेन गेट के सामने कीचड़ या गंदगी हो तो परिवार के सदस्य में किसी न किसी तरह की बीमारियों के घिरे रहते हैं। इसलिए, ध्यान रखें कि घर के आस-पास किसी तरह की गंदगी न रहे।
4. मेन गेट के सामने गंदा पानी इकट्ठा रहता हो तो घर के लोगों को कई तरह के रोगों का सामना करना पड़ सकता है। ध्यान रखें कि घर के सामने गंदा पानी जमा न हो सके। ऐसा होने पर तुरंत ही उसे साफ करवा लें।
5. मेन गेट के ठीक सामने घर का मंदिर या पूजा स्थल नहीं होना चाहिए। ऐसा होने से घर में देवी-देवता निवास नहीं करते और घर में बीमारियां और दुख बने रहते हैं। इससे बचने के लिए ध्यान रखें कि घर का मंदिर यहां न होते हुए कहीं और हो।
6. सूखे या कांटेदार पौधों को घर के आंगन में नहीं रखना चाहिए। ऐसे पौधे घर में कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। घर के आगन में हरे-भरे पेड़-पौधे लगाएंगे तो घर में कम से कम बीमारियां आएंगी। ध्यान रखें उन पेड़-पौधों की नियमित रूप से देख-भाल की जाए।
11:30:00 am

रुद्राक्ष पहनने के हैं कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ, जानते ही धारण करेंगे आप!


रुद्राक्ष पहनने के हैं कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ, जानते ही धारण करेंगे आप!

भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष का बहुत महत्व है।रुद्राक्ष भगवान शिव की कृपा का प्रतीक है।इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गुणों के कारण अद्भुत शक्ति होती है।स्मरण शक्ति को बेहतर बनाने में कारगर माना जाता है।
भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष का बहुत महत्व है। यह हिंदू पौराणिक कथाओं और तांत्रिक संप्रदाय के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण और रहस्यमय मनका है। माना जाता है कि रुद्राक्ष इंसान को हर तरह की हानिकारक एनर्जी से बचाता है। इसका इस्तेमाल सिर्फ तपस्वी ही नहीं, बल्कि सांसारिक जीवन में रह रहे लोग भी करते हैं। आपने भी अक्‍सर कुछ तपस्वियों के साथ आम लोगों की गर्दन के चारों ओर रुद्राक्ष की माला को देखा होगा। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि इस आश्‍चर्यजनक मनका को पहनने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। 
                             


 शिव पुराण के अनुसार, रुद्राक्ष भगवान शिव की कृपा का प्रतीक है। रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिव के आंसुओं से मानी जाती है। ये मनका शिव के आंसू से तब बने जब वह एक गहरे ध्यान से बाहर आए थे। जब उन्होंने अपनी आंखें खोलीं तो उनमें से कुछ आंसू की बूंदे गिर गईं। इन्हीं आंसू की बूंदों से रुद्राक्ष नामक वृक्ष उत्पन्न हुआ। 
वैज्ञानिकों के अनुसार रुद्राक्ष में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गुणों के कारण अद्भुत शक्ति होती है। इसकी औषधीय क्षमता विद्युत चुंबकीय प्रभाव से पैदा होती है। रुद्राक्ष के विद्युत चुंबकीय क्षेत्र एवं तेज गति की कंपन आवृत्ति स्पंदन से वैज्ञानिक भी आश्चर्य चकित हैं। इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी फ्लोरिडा के वैज्ञानिक डॉक्‍टर डेविड ली ने अनुसंधान के बाद बताया कि रुद्राक्ष विद्युत ऊर्जा के आवेश को संचित करता है जिससे इसमें चुंबकीय गुण विकसित होते है। इसे डाय इलेक्ट्रिक प्रापर्टी कहा गया। इसकी प्रकृति इलेक्ट्रोमैग्नेटिक व पैरामैग्नेटिक है एवं इसकी डायनामिक पोलेरिटी विशेषता अद्भुत है। यह आवेग मस्तिष्क में कुछ केमिकल्स को प्रोत्साहित करते हैं, इस प्रकार शरीर का चिकित्सकीय उपचार होता है। शायद यह भी एक कारण है कि रुद्राक्ष के शरीर से स्‍पर्श होने से लोग बेहतर महसूस करते हैं।
रुद्राक्ष का मानसिक प्रभाव
रुद्राक्ष बौद्धिक क्षमता और स्मरण शक्ति को बेहतर बनाने में भी कारगर माना जाता है। आज के समय में अक्सर लोग तनाव और चिंता में डूबे रहने के कारण कई तरह की बीमारियों से ग्रस्‍त हो जाते हैं। रुद्राक्ष धारण करने से चिंता और तनाव से संबंधी परेशानियों में कमी आती है, उत्साह और ऊर्जा में वृद्धि होती है।
रुद्राक्ष का दिल पर प्रभाव
रक्त परिसंचरण और दिल की धड़कन शरीर के चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र लाती है, विशेष रूप से दिल के क्षेत्र में। कीमोफार्माकोलॉजिकल विशेषताओं के कारण यह हृदयरोग, रक्तचाप एवं कोलेस्ट्रॉल स्तर नियंत्रण में प्रभावशाली है। नर्वस सिस्टम पर भी यह प्रभाव डालता है एवं संभवत:न्यूरोट्रांसमीटर के प्रवाह को संतुलित करता है। इसके अलावा वैज्ञानिकों द्वारा इसका बायो केमिकल विश्लेषण कर इसमें कोबाल्ट, जस्ता, निकल, आयरन, मैग्नीज, फास्फोरस, एल्युमिनियम, कैल्शियम, सोडियम, पोटैशियम, सिलिका एवं गंधक तत्वों की उपस्थिति देखी गई। रुद्राक्ष को धारण करना किडनी और डायबिटीज में भी फायदेमंद होता है।

2 मुखी रूद्राक्ष
2 मुखी रुद्राक्ष को आंखों के विकार, हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क, गुर्दे और आंत की बीमारियों से ग्रस्‍त लोगों को धारण करने के लिए कहा जाता है।
5 मुखी रूद्राक्ष
रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर 21-मुखी तक होते हैं, जिन्हें अलग-अलग प्रयोजन के लिए पहना जाता है। हालांकि पंचमुखी रुद्राक्ष सबसे सुरक्षित विकल्प है जो हर किसी–स्त्री, पुरुष, बच्चे, हर किसी के लिए अच्छा माना जाता है। यह सेहत और सुख की दृष्टि से भी फायदेमंद हैं, जिससे रक्तचाप नीचे आता है और स्नायु तंत्र तनाव मुक्त और शांत होता है।
रुद्राक्ष का पेड़
वैज्ञानिकों के अनुसार रूद्राक्ष एक सदाबहार वृक्ष है। रुद्राक्ष के ज्यादातर वृक्ष उत्‍तरी, नेपाल, थाईलैंड या इंडोनेशिया में पाये जाते हैं। इसके बीज को रूद्राक्ष कहा जाता है जिसे माला में बुना जाता है। रुद्राक्ष के प्रभाव से आसपास का संपूर्ण वातावरण शुद्ध हो जाता है
11:27:00 am

कब छपा भारत का पहला नोट और नोट पर कब छपी महात्मा गांधी की तस्वीर, जानिए

कब छपा भारत का पहला नोट और नोट पर कब छपी महात्मा गांधी की तस्वीर, जानिए

आज दैनिक जागरण की बिजनेस टीम आपको नोटों से जुड़ा खास इतिहास बताने जा रही है। जानिए भारत में कब छपा पहला नोट......
                               



  नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से बीते 8 नवंबर को किए गए नोटबंदी के फैसले के बाद इसको लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। वहीं बाजार में आए 2000 रुपए के नोट को लेकर भी कुछ लोगों में दुविधा है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि नोटों पर बैन पहली बार लगा है। आजाद भारत में ऐसा कई बार हो चुका है। आज दैनिक जागरण की बिजनेस टीम आपको नोटों से जुड़ा खास इतिहास बताने जा रही है। जानिए भारत में कब छपा पहला नोट......
भारत का पहला नोट बैंक ऑफ हिंदुस्तान ने सन् 1770 में जारी किया था। ये नोट 10 रुपए से 10 हजार रुपए तक की कीमत के थे।
बैंक ऑफ हिंदुस्तान बंगाल प्रेसिडेंसी के तहत काम करने वाला एक प्राइवेट बैंक था। इसके अलावा मुंबई प्रेसिडेंसी की ओर से भी नोट जारी किए गए थे।साल 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने रुपए को आधिकारिक मुद्रा बनाया और इसे पूरे देश में लागू किया गया।अंग्रेजी शासन से पहले राजाओं की ओर से भी नोट जारी किए जाते थे।गोवा में जहां पुर्तगाली सरकार की ओर से जारी किए गए नोट चलते थे वहीं पुडुचेरी में फ्रांसीसी सरकार नोट जारी करती थी।अंग्रेजों के दौर में जारी नोटों पर जॉर्ज पंचम और क्वीन विक्टोरिया की तस्वीरें होती थीं।
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साल 1938 में अब तक का सबसे बड़ा नोट 10 हजार रुपए का छापा गया था।पहली बार जनवरी 1946 और दोबारा 1978 में भी 1000 और उससे ज्यादा मूल्य के नोटों को चलन से बाहर किया गया था।जनवरी, 1946 से पहले तक 1000 और 10 हजार रुपए के बैंक नोट चलन में थे।साल 1949 में आजाद भारत का पहला नोट एक रुपए का छापा गया। इसके ऊपर सारनाथ के सिंहों वाले अशोक स्तंभ की तस्वीर थी।
1954 में 1000, 5000 और 10,000 रुपए के नोटों को दोबारा लाया गया। जनवरी 1978 में इन सभी को बंद कर दिया।सन् 2000 में 1000 रुपए के नोट ने वापसी की।आजादी के बाद नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर यूज (साल 1969) की जाने लगी।
10:51:00 am

काला जादू से ज्यादा शैतानी है यह धर्म !!

काला जादू से ज्यादा शैतानी है यह धर्म !!


अभी तक आपने ऐसे नए धर्म के बारे में सुना होगा जिसके अनुसार व्यक्ति अपनी आत्मा के बल पर अपने सभी  बुरे अनुभवों से पीछा छुड़ा सकता है। इसे साइंटोलॉजी नाम से जाना जाता है और इस नए धर्म से हॉलीवुड के ख्‍यात हीरो टॉम क्रूज को भी जुड़ा बताया जाता रहा है, लेकिन अब नया धर्म सामने आ गया है जिसे 'शैतानी सेक्सी धर्म' कहा जाता है।इसके संस्थापक एलिस्टर क्राउली ने खुद को विश्व का सबसे बुरा आदमी घोषित किया था। 1875 में पैदा हुए क्राउली ने खुद को 'द ग्रेट बीस्ट, 666' की शैली में ढाला था। यह एक ऐसा धर्म था जिसे मानने वाले गोपनीय तरीके से रहते हैं और इसके बारे में भी बहुत कम ही जाना जाता है।


पर अब इस धर्म की सबसे ग्लैमरस और चर्चित प्रचारक पीचेस गेडोफ हैं, जो कहती हैं कि उनका विलीफ सिस्टम दिन-प्रतिदिन के जीवन में भी प्रयोग किया जाता है और इससे व्यक्ति को बहुत शांति मिलती है। लेकिन पीचेस गेडोफ ने जब अपनी धार्मिक मान्यताओं के बारे में ट्‍विटर पर अपने एक लाख 48 हजार सहयोगियों को बताया तो दुनिया को एक ऐसे धर्म की जानकारी मिली जो शैतानों की जीवनशैली लगती है।  चौबीस वर्षीय पीचेस ओटीओ (ओर्डो टेम्पली ओरिएंटिस) की भक्त हैं। ओटीओ उन्होंने अपनी बाईं बांह पर गुदवा भी लिया है। हालांकि उनके लिए धर्म जैसी किसी बात का पालन करना फैशन से ज्यादा नहीं है। पीचेस एक समय साइंटोलॉजिस्ट थीं, बाद में इसे छोड़कर वे यहूदी धर्म मानने लगीं, लेकिन हाल में उन्होंने इस नए धर्म को न केवल मानने की ठानी वरन इसका वे प्रचार-प्रसार भी करती हैं। अब एक निगाह ओटीओ और इसके संस्थापक एलिस्टर क्राउली के में जानें। वे इस धर्म के संस्थापक पैगम्बर थे। वे 1875 में एक सम्पन्न ब्रिटिश परिवार में पैदा हुए थे, पर उन्होंने खुद को 'द ग्रेट बीस्ट 666' का दर्जा दिया था। वह जादू-टोनों और गूढ़ विद्याओं को मानने वाला था। 1947 में मौत से पहले उसे इस बात का गर्व था कि वह '‍दुनिया का सबसे दुष्कर्मी प्राणी' है।पीचेस एक समय साइंटोलॉजिस्ट थीं, बाद में इसे छोड़कर वे यहूदी धर्म मानने लगीं, लेकिन हाल में उन्होंने इस नए धर्म को न केवल मानने की ठानी वरन इसका वे प्रचार-प्रसार भी करती हैं।


हॉलीवुड की एक और हस्ती जे जेड के बारे में भी ऐसा ही कहा जाता है। रैपर जे जेड के बारे में कहा जाता है कि वे क्राउली की किताबों से संग्रहित बातों को फैलाने में यकीन रखते हैं। प्रसिद्ध गायिका रिहाना के बारे में भी कहा जाता है कि उनके कुछ वीडियोज में इनका असर दिखता है। पीजेस से जब उनके एक टि्वटर अनुयायी ने पूछा कि वह थेल्मा (क्राऊली की शिक्षाओं) के बारे में कै‍से जान सकती हैं, पीचेस ने कहा उनकी किताबें पढ़ो जो सुपर इंट्रेस्टिंग हैं।कुछ लोग इसको कारोबारी अवसरवाद भी कहते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इस तरह की किताबें और क्रियाकलाप युवा लोगों को बहुत जल्दी प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन इसके मानने वाले युवा नहीं वरन ऐसे लोग हैं जो क्राउली की किताबों में बताए गए धार्मिक क्रियाओं, तंत्र-मंत्र को आजमाते हैं। ब्रिटेन में ओटीओ के प्रमुख जॉन बोनर (62) का कहना है कि हम मास अपील वाले संगठन नहीं हैं। ब्रिटेन में हमसे सैकड़ों लोग जुड़े हैं और सारी दुनिया में हमारे मानने वालों की संख्‍या हजारों में हो सकती है। ईस्ट ससेक्स में रहने वाले बोनर का कहना है कि एक तरीके से आप हमें सेक्स धर्म वाले भी कह सकते हैं क्योंकि हम इसे मानते, स्वीकार करते हैं और पूजते हैं।

मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

3:50:00 pm

सलमान के घर में भी है एक बरमुडा ट्रेंगल, जहां गुम हो जाती हैं लड़कियां


सलमान के घर में भी है एक बरमुडा ट्रेंगल, जहां गुम हो जाती हैं लड़कियां
जानकर आश्चर्य होगा कि सलमान खान के घर पर भी एक बरमुडा ट्रेंगल है ‍‍जहां उनके घर आई लड़कियां खो जाती हैं। यह बात खुद सलमान खान के भाई सोहेल खान ने कही है। आनेे वाले संडे को तीनों खान भाई, करण जौहर के शो पर कई और राज खोलेंगे

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सोहेल, अरबाज और सलमान खान तीनों ही 'कॉफी विद करण' के 100वें एपिसोड पर दिखेंगे। यह खास शो अगले संडे ऑन एअर होगा। इस शो पर तीनों भाइयों ने करण अपने से जुड़ी कई बातें बताई हैं। सोहेल का शो पर कहना था कि अरबाज के कमरे को हम हमारे घर का बरमुड़ ट्रेंगल कहते हैं, जहां घर आई हर महिला गायब हो जाती है। इसके अलावा करण ने अरबाज को टॉप पांच हीरोइन चुनने के लिए कहा लेकिन उन्हें बीच में रोकते हुए भाईजान ने कटरीना का नाम ले लिया। सलमान ने कहा पहले से लेकर चार नंबर तक केवल कटरीना उनकी पसंद है।
इसके अलावा सलमान ने खुद से जुड़े सीक्रेट के बारे में बताया। एक्टर ने इस बात को स्वीकार किया कि अरबाज, सोहेल और वो खुद आपस में अंडरवियर शेयर करते हैं। बता दें कि करण का शो राज से पर्दा हटाने के लिए जाना जाता है। वैसे इसी सीजन का सबसे मजेदार एपिसोड टि्‍वंकल खन्ना के नाम है।

सोमवार, 5 दिसंबर 2016

7:37:00 pm

Jai SIDHBABA dii

Jai SIDHBABA dii

      Jai SIDHBABA dii
😇😇😇😇😇😇😇😇😇
 हो सकता है आप सोचे की ये कौन सा नया भगवन है या बाबा है , लेकिन शायद आपको जानकर हैरानी होगी की ये बाबा आपकी हर परेसानी दूर कर देंगे ये बाबा आपकी है wish पूरी कर देंगे , इनकी सच्ची और दिल से करी गई भक्ति कभी बेकार नहीं जाती , ये करते है हर मनोकामना , हर दुखी और परेसान की करते है मदद , जब हर देवता हर बाबा हो जाता है बेकार , हर टोना टोटका हो जाता है ख़राब और हर मन लेती है उमीद की सांसे और तोड़ने लगती है आपने दम तो , तब भी करते है पूरी मदद , हर बीमारी , हर दुःख , हर नाकामयाबी के उभारते है ये बाबा बस मांगते है ये

मांगते है सिर्फ ये.....

1. सुबह सुबह सबसे पेल्हे नहाकर एक लोटा जल उनके मंदिर की दिशा में उनका नाम लेते हुए , जल चढ़ाते समय नाम करीब 6 बार लेना है या फिर काम से कम 1 बार तो लेना है और बाकि 5 नाम बार जल चढ़ाने के बाद ।
2. जो मन्नत मांगी है उनसे , वो पूरी होने पर उनसे किया वादा जरूर पूरा करना होता है वरना उनके गुस्से से आपको कोई देवता या कोई बाबा , या कोई टोटका नहीं बचा सकता , न ही कोई तांत्रिक , सिर्फ एक तरीका रह जाता है और वो उनको मनांना ,लेकिन इसका मैल्ड ये नहीं की आप बार बार इस तरह कोई गलती जान कर करेंगे , क्योंकि ऐसा होने पर वो आपको उसका नतीजा बुगतना ओढ सकता है ।

3. उनकी कृपया पाने के लिए उनके नाम पर गरीबो की मदद करनी चाहिए ।

4. उनको खुस करने के लिए अनाथ बचो की पढाई मैं मदद करनी चाहिये चाहिये ।

5. गलत काम कभी नहीं करने चाहिए जैसे मास्स और सराब पीना और किसी को सताना  ।

6. आपकी मन्ना किसी गलत काम के लिए नहीं होनी चाहिए , उससे किसी का नुकसान या बुरा मन में रखकर मांगी मन्नत उलटी भी पड सकती है ।

रविवार, 4 दिसंबर 2016

5:22:00 pm

10,000 कमरों वाले इस होटल में आखिर क्‍यों नहीं आता कोई, ये कहानी है बड़ी पुरानी

10,000 कमरों वाले इस होटल में आखिर क्‍यों नहीं आता कोई, ये कहानी है बड़ी पुरानी





ये है वो होटल
ये होटल जर्मनी के बाल्‍टिक सागर के आइलैंड पर बना हुआ है। दुनिया के सबसे बड़े इस होटल में 10,000 बेडरूम हैं। इतने बड़े होटल के बारे में ये जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि अब ये पूरी तरह से वीरान पड़ा है। इंसान तो छोड़ो, कोई जानवर भी गलती से इस ओर रुख नहीं करता। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर कब बना ये होटल और क्‍यों है इसका ऐसा हाल।
इतना पुराना है ये होटल< ये होटल नाजी शासन के दौरान बना था। ये वक्‍त था 1936 से 1939 के बीच का। इस होटल को बनवाने में तीन साल का वक्‍त लगा था। 9000 लेबरफोर्स ने मिलकर इसको तीन साल में बनाकर खड़ा किया था। इस होटल की खासियत ये है कि इसमें एक जैसी 8 बिल्‍डिंगें बनाई गई थीं। इनमें से हर बिल्‍डिंग की लंबाई 4.5 किलोमीटर है।
एडोल्‍फ हिटलर चाहता था ऐसा
ये बिल्‍डिंग समुद्र से 150 मीटर की दूरी पर स्‍थित है। इसको लेकर बताया गया है कि जर्मनी के तानाशाह एडोल्‍फ हिटलर पहले इस जगह पर घुमावदार सी रिसॉर्ट बनाना चाहते थे। एक ऐसा सी रिसॉर्ट जो दुनिया का सबसे बड़ा रिसॉर्ट हो। इस बारे में उन्‍होंने सारी योजना भी बनानी शुरू कर दी थी, लेकिन इससे पहले कि इसपर काम शुरू हो पाता सेकेंड वर्ल्‍ड वॉर शुरू हो गई। वैसे इतनी पुरानी और वीरान होने के बाद भी ये बिल्‍डिंग काफी खूबसूरत है। वो बात और है कि सिर्फ कुछ ब्‍लॉकों को छोड़कर इसके बाकी सभी ब्‍लॉक खंडहर में तब्‍दील हो चुके हैं।    

सोमवार, 28 नवंबर 2016

6:46:00 pm

दुनिया के ये 6 लोग मजाक-मजाक में हो गये मालामाल

दुनिया के ये 6 लोग मजाक-मजाक में हो गये मालामाल

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आज मॉडर्न टेक्नोलॉजी की वजह से हमारे पास ऐसे यंत्र आ गए हैं जिनसे खजानों का ठिकाना पता करना आसान हो गया है, इन लोगों ने सिर्फ मेटल डिटेक्टर्स की मदद से ही इन खजानों का पता लगाया।

कहते हैं न कि ढूंढने से तो भगवान भी मिल जाते हैं, फिर खजाना क्या चीज है! दुनिया में कई जगहों पर अनमोल खजाने छिपे हुए हैं लेकिन कहा ये जाता है कि जिसकी किस्मत में जो होता है उसे वही मिलता है। लेकिन अब ऐसा नही है इन खजानों को पता लगाने वाले आप और हमारे जैसे सामान्य लोग ही हैं जिनकी किस्मत और मेहनत ने उन्हें करोड़पति बना दिया। आज मॉडर्न टेक्नोलॉजी की वजह से हमारे पास ऐसे यंत्र आ गए हैं जिनसे खजानों का ठिकाना पता करना आसान हो गया है, इन लोगों ने सिर्फ मेटल डिटेक्टर्स की मदद से ही इन खजानों का पता लगाया। गजबपोस्ट के अनुसार ये है इनकी कहानी और अब आप भी लग जाइये इस खजाने की खोज में।

1. खजाना: रोमन कॉइन होर्ड

जगह: फ्रॉम, सॉमरसेट

साल: 2010


डेव क्रिस्प फ्रॉम शहर के एक खेत में कुछ ढूंढ रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि शायद एक रोमन सिक्का मिल जाए लेकिन कुछ घंटों बाद ही उनके मेटल डिटेक्टर से आवाज आने लगी। पता चला कि रोमन युग के चांदी के सिक्कों का अब तक का सबसे बड़ा खजाना उनके हाथ लग गया था।

3 दिन तक चली खुदाई में 52,000 रोमन सिक्के मिले जिसकी कीमत करीब 5,00,000 पाउंड्स थी. लेकिन दुर्भाग्य से ये सारा खजाना राजकोष में चला गया।

2. खजाना: सिल्वरडेल होर्ड

जगह: हैरोगेट, नार्थ यॉर्कशायर

साल: 2007


डेविड और उसका बेटा एंड्रू नार्थ यॉर्कशायर के एक खेत में कुछ खोज रहे थे कि तभी लोहे के टुकड़ों के बीच उन्हें चांदी का एक बाउल मिला जिस पर बहुत सुन्दर नक्काशी थी. इसके बाद खुदाई करने पर उन्हें वहां से 617 चांदी के सिक्के और 65 चांदी केआइटम्स मिले। बताया जाता है कि ये सारी चीजें 900 अऊ में फ्रांस या जर्मनी में बनी थीं। इस खजाने को यॉर्कशायर म्यूजियम को बेच दिया गया था। डेविड और खेत के मालिक को 1 मिलियन पाउंड्स की भारी रकम मिल गयी।

3. खजाना: रिंगलमेयर कप

जगह: सैंडविच, केंट

साल: 2001


एक धुंधली सुबह, कीचड़ में कुछ ढूंढते हुए, ईस्ट केंट में रहने वाले क्लिफ ब्रैडशॉ ने अपने मेटल डिटेक्टर की आवाज सुनी। वहां खुदाई करने पर उन्हें एक दुर्लभ और उत्कृष्ट सोने का प्याला मिला, जिसे अब रिंगलमेयर कप के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार का ये दुनिया में दूसरा ही प्याला है। बताया जाता है कि ये प्याला कांस्य-युग (2300 इउ) का है। इस कप को ब्रिटिश म्यूजियम ने क्लिफ ब्रैडशॉ से 2,70,000 पाउंड्स में खरीदा था। मुझे तो लगता था कि कीचड़ में सिर्फ कमल ही खिलता है, यहां तो खजाना मिल गया।

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4. खजाना: फिशपूल होर्ड

जगह: रेवन्सहेड, नॉटिंघमशायर

साल: 1966


1966 में, एक बिल्डिंग बनाने के लिए खुदाई करने पर मजदूरों को मध्यकालीन युग के सिक्कों का खजाना मिला। ब्रिटेन के इतिहास का ये सबसे बड़ा खजाना था। 15वीं शताब्दी के इस खजाने में 1,237 सोने के सिक्के, 4 अंगूठियां, 4 गहने और 2 सोने की चेन थीं।

अनुमान ये था कि युद्ध से भागते वक्त किसी ने इस खजाने को यहां छुपा दिया था। यहां मिले गहने बहुत ही सुन्दर और अनमोल हैं, इसीलिए ब्रिटिश म्यूजियम ने इस खजाने को 3,00,000 पाउंड्स में खरीद लिया।

5. खजाना: किंग्स रैनसम

जगह: लिचफील्ड, स्टैफोर्डशायर

साल: 2009


लिचफील्ड के प्राचीन शहर में कई खजाने दफन हैं, लेकिन इस छोटे से आइलैंड पर इतना बड़ा खजाना मिलेगा, ये किसी ने नहीं सोचा था। एक किसान के खेत में खुदाई करते वक्त टेरी हर्बर्ट को 5 किलो सोने और 1.3 किलो चांदी के जेवरात मिले।

ये जेवर एंग्लो-सैक्सन आर्ट के बहुत ही नायब नमूने थे। इस खजाने की कीमत करीब 3.26 मिलियन पाउंड्स थी। ये खजाना अब ब्रिटिश म्यूजियम में रखा हुआ है।

6. खजाना: हॉक्सन होर्ड

जगह: हॉक्सन, सफिक

साल: 1992


अब तक मिले सारे खजाने मेटल डिटेक्टर की मदद से मिले हैं, लेकिन हॉक्सन का ये खजाना तक मिला जब कुछ आदमी अपना हथौड़ा ढूंढने की कोशिश कर रहे थे। पीटर व्हॉट्लिंग ने अपने दोस्त एरिक को वो हथौड़ा खोजने के लिए बुलाया लेकिन खुदाई करते वक्त उन्हें कई हीरे-जवाहरात, चांदी के चम्मच और सोने गहने मिले।

पूरी तरह खुदाई करने पर वहां से 15,000 रोमन सिक्के और 200 दूसरी दुर्लभ चीजें मिलीं। इस खजाने के लिए एरिक को 1.75 मिलियन पाउंड्स की राशि मिली जो उसने अपने दोस्त पीटर के साथ बांटी। इतनी रकम किसी खजाना ढूंढने वाले को पहली बार मिली है।

7:56:00 am

नोटबंदी के दौर में जानें विश्व के 5 सबसे महंगे नोटों के बारे में!


नोटबंदी के दौर में जानें विश्व के 5 सबसे महंगे नोटों के बारे में!

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं. विश्व के 5 सबसे महंगे नोटों के बारे में. आपको ये जान कर हैरानी होगी कि इन 5 सबसे ताकतवर नोटों की लिस्ट में अमेरिका शामिल नहीं है. आगे की स्लाइड्स में जानें इन नोटों के बारे में...!

1 कुवैत दीनार 224.33 भारतीय रुपए.

1 बहरीन दीनार 181.70 भारतीय रुपए

1 ओमान रियाल 178.01 भारतीय रुपए

1 लात्विया लात 110.42 भारतीय रुपए.

1 जॉर्डन दीनार 96.69 भारतीय रुपए.

7:42:00 am

कहा जाता है कि यह स्थल भगवान शिव जी और पार्वती जी का विवाह स्थल है

कहा जाता है कि यह स्थल भगवान शिव जी और पार्वती जी का विवाह स्थल है

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देवाति देव महादेव और देवी पार्वती का पवित्र विवाहस्थल! भगवान शिव जी और देवी पार्वती के विवाहस्थल की मनुस्मृति! शिवभक्तों के अनुसार विश्व की उत्पत्ति शिव की कृपा से हुई है और एक दिन यह शिव में ही विलीन हो जाएगी। भगवान भोले का शृंगार, विवाह, तपस्या और उनके भक्तगण - सब अद्वितीय हैं। उनके विवाह, तपस्या और भक्तों पर कृपा की कई कथाएं प्रचलित हैं।और ये कथाएं जहाँ जहाँ घटी हैं वे जगह आज तीर्थस्थलों के रूप में प्रसिद्द हैं।

उत्तराखंड जो ऐसे ही कई धार्मिक और पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्द है। यहाँ के कई स्थल सिर्फ पर्यटक स्थल के रूप में ही नहीं, पवित्र तीर्थस्थलों के रूप में भी लोकप्रिय हैं। यह पवित्र राज्य कई नदियों और संगमों का भी उद्गम स्थल है, और हर एक स्थान के पीछे एक रहस्य भी जुड़ा हुआ है। यहाँ का त्रियुगीनारायण मंदिर ऐसे ही पौराणिक मंदिरों में से एक है, जो उत्तराखंड के त्रियुगीनारायण गाँव में स्थित है। यह गाँव रुद्रप्रयाग जिले का ही एक भाग है। त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह स्थल भगवान शिव जी और पार्वती जी का विवाह स्थल है।

इस मंदिर की एक खास विशेषता है, मंदिर के अंदर जलने वाली अग्नि जो सदियों से यहाँ जल रही है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव जी और देवी पार्वती जी ने इसी अग्नि को साक्षी मानकर विवाह किया था। इसलिए इस जगह का नाम त्रियुगी पड़ गया जिसका मतलब है, अग्नि जो यहाँ तीन युगों से जल रही है। जैसा कि यह अग्नि नारायण मंदिर में स्थित है, इसलिए इसे पूरा त्रियुगीनारायण मंदिर कहा जाता है।

रुद्रप्रयाग पहुँचें कैसे? तो चलिए आज हम खुद भगवान शिव जी और देवी पार्वती के महा मिलन, उनके विवाह के साक्षी बनने के लिए चलते हैं। शिव और पार्वती का पवित्र विवाहस्थल! त्रियुगीनारायण मंदिर कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती अपने पिछले जन्म में देवी सती के नाम से भगवान शिव जी की पत्नी थीं, पर उनके पिता द्वारा जब भगवान शिव जी का अपमान किया गया, उनहोंने वहीं आत्मदाह कर अपने प्राणों की आहुति दे दी। मृत्यु के बाद अपने अगले जन्म में उन्होंने राजा हिमवत की पुत्री के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव जी को अपनी सुंदरता से लुभाने के लिए हर एक कोशिश की।

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