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गुरुवार, 15 सितंबर 2016

6:41:00 pm

एनोनिमस


एनोनिमस


सबसे खतरनाक हैकर के समूह एनोनिमस के बारे में..World’S Biggest Hacker Group in Hindi Powered by कॉरमैन ही नही बल्कि दुनिया के तमाम सुरक्षा विशेषज्ञ इनका ज़िक्र किसी न किसी संदर्भ में करते हैं. सब इनका सम्मान करते हैं ओर सब इनसे डरते भी हैं. सोनी प्लेस्टेशन के नेटवर्क पर अटैक करके एनोनिमस समूह ने अपार लोकप्रियता हासिल की. इनका ऐसा खोफ बना है कंपनिया सबसे ज़्यादा ध्यान इनसे बचने पर लगाती है. सोनी ने अपने प्लेस्टेशन को इनके हमलों से बचाने के लिए अनगिनत उपाय किए lएनोनिमस समूह ने पिछले दिनो एक बड़ी चेतावनी दुनिया के लिए जारी की थी. एनोनिमस समूह के टिवटर अकाउंट के ज़रिए ख़बर आई थी कि इस समूह के हैकर 31 मार्च को सारी दुनिया का internet network को ठप्प कर देंगे. पूरे मार्च इस बात की अटकलें लगाई जाती रही. 30 मार्च को भी टिवटर पर इसका मैसेज आया. लेकिन बाद में एनोनिमस समूह ने इसका खंडन कर दिया. फिर भी पूरी दुनिया खोफ में है की किसी समय इस समूह के hackers पूरी दुनिया के internet network को ठप्प कर देंगे. इस समूह की ओर से बताया गया था कि उन्होंने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है की सारे नेटवर्क के DNS सर्वर को एक बार में रोक सकते हैं कभी दुनिया ने इससे पहले ऐसा न सुना है न देखा है. इसलिए एनोनिमस समूह की इस नई चुनोती से निपटने की तैयारी पूरी दुनिया में चल रही है
6:15:00 pm

24 ज़बरदस्त Science Facts जिन्हें लोग समझते हैं झूठ

24 ज़बरदस्त Science Facts जिन्हें लोग समझते हैं झूठ









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Science facts: पर विश्वास करना थोड़ा कठिन है, पर यह सच के ज़्यादा करीब है कि आज भी दुनिया में कुछेक ऐसी चीज़ें हैं जो विज्ञान और वैज्ञानिकों से परे बनी हुई हैं. इंसानी शरीर की कई पहेलियां विज्ञान अभी भी सुलझाने की कोशिश कर रहा है. साइंस के नाम पर कई वैज्ञानिक अजीबोगरीब तरह के एक्सपेरिमेंट करते रहते हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे “Science facts” बताएंगे जो आपको शायद न पता हो.

Science Facts in Hindi
विज्ञान से जुड़े तथ्य

1. वैज्ञानिक आज तक निश्चित नहीं कर पाए हैं, कि डायनासोर का रंग क्या था।
2. शुक्र ग्रह पर एक दिन पृथ्वी के एक साल से बड़ा होता है।
3. आपकी जानकारी के लिए बता दे -40 डिग्री फारेनहाइट -40 डिग्री सेल्सियस के बराबर है।
4. शनि ग्रह का घनत्व इतना कम हैं कि यदि कांच के किसी विशालकर बर्तन में पानी भरकर शनि को उसमें डाला जाये तो वह उसमें तैरने लगेगा।
5. तापमान चाहे कितना भी कम क्यों न हो जाए, गैसोलीन कभी भी नहीं जमता।
6. जब आप किसी सीधी चढ़ाई वाले पहाड़ पर चढ़ते हैं तो आपके घुटनों पर आपके शरीर का तीन गुना भार होता है।
7. अगर किसी एक आकाश गंगा के सारे तारे नमक के दाने जितने हो जाए तो वह Olympic का पूरा का पूरा Swimming pool भर सकते हैं.
8. हवा तब तक आवाज नही करती जब यह किसी वस्तु के विपरीत न चले.
9. बृहस्पति इतना बड़ा ग्रह हैं की यदि शेष सभी ग्रह को आपस में जोड़ दिया जाये तो वह संयुक्त ग्रह भी बृहस्पति से छोटा ही रहेगा।
10. एक व्यक्ति बिना खाने के एक महीना रह सकता है पर बिना पानी के 7 दिन. अगर शरीर में पानी की मात्रा 1 प्रतिशत से कम हो जाए तो आप प्यास महसूस करने लगते है. अगर यह मात्रा 10 प्रतिशत से कम हो जाए तो आप की मौत हो जाएगी.
11. अभी तक उल्का पिंड द्वारा सिर्फ एक ही बनावटी उपग्रह नष्ट किया गया है. यह उपग्रह European Space Agency का Olympics(1993) था.
12. एक नजरिये से तापमान मापने के लिए Celsius स्केल Fahrenheit स्केल से ज्यादा अक्लमंदी से बनाया गया. पर इसके निर्माता Andero Celsius एक अनोखे वैज्ञानिक थे. जब उन्होंने पहली बार इस स्केल को विकसित किया, उन्होंने गलती से जमा दर्जा 100 और ऊबाल दर्जा 0 डिग्री बनाया. पर कोई भी उन्हें इस गलती को कहने का हौसला न कर सका, सों बाद के वैज्ञानिकों ने सकेल को ठीक करने के लिए उनकी मृत्यु का इंतजार किया.
13. Albert Einestein के अनुसार हम रात को आकाश में लाखों तारे देखते है जगह नही होते बल्कि कही और होते है. हमें तों उनके द्वारा छोडा गया कई लाख प्रकाश साल पहले का प्रकाश होता है.
14. आम तौर पे classes में पढ़ाया जाता है कि प्रकाश की गति 3 लाख किलोमीटर प्रति सैकेंड होती है. पर असल में यह गति 2,99,792 किलोमीटर प्रति सैकेंड होती है. यह 1,86,287 मील प्रति सैकेंड के बराबर होती है.
15. October 1992 में लंदन के आकार जितना बड़ा बर्फ का गोला Antarctic से टूट कर अलग हो गया था.
16. अगर हम प्रकाश की गति से अपनी नजदीकी गैलैक्सी (Galaxy) पर जाना चाहे तो हमें 20 साल लगेगें.
17. विश्व की सबसे भारी धातु ऑस्मियम है। इसकी 2 फुट लंबी, चौड़ी व ऊँची सिल्ली का वज़न एक हाथी के बराबर होता है।
18. जब पानी से बर्फ बन रही होती तो लगभग 10% पानी तो उड़ ही जाता है. इसलिए ही हमारे फ्रिज में Tray (ट्रे) पर पानी जमा हो जाता है.
19. दुनिया के सबसे महंगे पदार्थ की कीमत सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। इसका नाम जानने के बाद आप ये सोंच भी नहीं सकेंगे कि वाकई में इसकी कीमत इतनी ज्यादा होगी। आपमें से ज्यादातर लोग इसे सोना, चांदी या हीरा मान रहे होंगे। अगर ऐसा है तो आपको गलतफहमी में है। दुनिया की सबसे महंगा पदार्थ एंटीमैटर(प्रतिपदार्थ) है। प्रतिपदार्थ पदार्थ का एक ऐसा प्रकार है जो प्रतिकणों जैसे पाजीट्रान, प्रति-प्रोटान, प्रति-न्युट्रान मे बना होता है. ये प्रति-प्रोटान और प्रति-न्युट्रान प्रति क्वार्कों मे बने होते हैं. इसकी कीमत सुनकर आपके होश उड़ जायेंगे। 1 ग्राम प्रतिपदार्थ को बेचकर दुनिया के 100 छोटे-छोटे देशों को खरीदा जा सकता है। जी हां,1 ग्राम प्रतिपदार्थ की कीमत 31 लाख 25 हजार करोड़ रुपये है। नासा के अनुसार,प्रतिपदार्थ धरती का सबसे महंगा मैटीरियल है। 1 मिलिग्राम प्रतिपदार्थ बनाने में 160 करोड़ रुपये तक लग जाते हैं। जहां यह बनता है, वहां पर दुनिया की सबसे अच्छी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। इतना ही नहीं नासा जैसे संस्थानों में भी इसे रखने के लिए एक मजबुत सुरक्षा घेरा है। कुछ खास लोगों के अलावा प्रतिपदार्थ तक कोई भी नहीं पहुंच सकता है। दिलचस्प है कि प्रतिपदार्थ का इस्तेमाल अंतरिक्ष में दूसरे ग्रहों पर जाने वाले विमानों में ईधन की तरह किया जा सकता है।
20. न्युट्रॉन तारे इतने घने होते हैं कि उनका आकार तो एक गोल्फ बाल जितना होता है मगर द्रव्यमान(वज़न) 90 अरब किलोग्राम होता है.
21. अगर धरती का आकार एक मटर जितना कर दें तो बृहस्पति इससे 300 मीटर दूर होगा और प्लुटो 2.5 किलोमीटर . मगर प्लुटो आपको दिखेगा नही क्योंकि तब इसका आकार एक बैक्टीरिया जितना होगा.
22. सूर्य द्वारा छोड़े गए 800 अरब से ज्यादा न्यूट्राॅन आपके शरीर में से गुजर गये होंगे जब तक आपने ये वाक्य पढ़ा है।
23. विश्व के विद्युत उत्पादन का एक तिहाई सिर्फ बल्बों के द्वारा प्रकाश पाने में खर्च होता है।
24. हर घंटे Universe सभी दिशाओ में 1 billion miles से भी ज्यादा फैल जाती है।
आपको ये science facts कैसे लगे कमेंट में जरूर बताएं. और अगर आपको किसी चीज के बारे में रोचक तथ्य चाहिए तो कमेंट करें.
6:07:00 pm

Important information about River Ganga in Hindi

Important information about River Ganga in Hindi 

गंगा नदी के बारे में महत्‍वपूर्ण जानकारी

  1. गंगा नदी का उद्गम स्‍थल केदारनाथ चोटी के उत्‍तर में गऊमुख नामक स्‍थान पर 6600 मीटर की ऊॅचाई पर हमानी से है
  2. यह नदी उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh)उत्तराखंड (Uttarakhand)बिहार (Bihar)पश्चिम बंगाल (West Bengal), बांग्‍लादेश अदि प्रदेशों से होकर गुजरती है
  3. गंगा नदी की कुल लम्‍बाई 2525 किमी है
  4. इस नदी का अंंत ग्‍वालन्‍दों के निकट ब्रह्मपुत्र के साथ मिलकर बंगाल की खाडी में होता है
  5. इस नदी की सहायक नदीयां अलकनन्‍दा, भागीरथी, रामगंगा, यमुना (Yamuna), गोमती, घाघरा, गण्‍डक,और कोसी है
  6. इस नदी के किनारे बसे नगर हरिद्वार, कानपुर, हलाहाबाद, पटना, भागलपुर, वाराणसी, कोलकाता हैं
  7. इस नदी पर बने प्रमुुख बॉध फरक्‍का बॉध और टिहरी बॉध हैंं
  8. गंगा नदी को नवंबर 2008 में भारत सरकार द्वारा भारत की राष्‍ट्री्य नदी का दर्जा दिया गया है
  9. गंगा नदी केे इलाहाबाद और हल्दिया के बीच गंगा नदी जलमार्ग- को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया है
  10. गंगा नदी के जल में बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं
6:03:00 pm

Interesting facts about Science in hindi

Interesting facts about Science in hindi (विज्ञान से संम्बंन्धित रोचक तथ्य)

 

1. आम तौर पे classes में पढ़ाया जाता है
कि प्रकाश की गति 3 लाख किलोमीटर
प्रति सैकेंड होती है. पर असल में यह
गति 2,99,792 किलोमीटर प्रति सैकेंड
होती है. यह 1,86,287 मील प्रति सैकेंड के
बराबर होती है.
2. हर एक सैकेंड में 100 बार
आसमानी बिजली धरती पर गिरती है.
3. हर साल आसमानी बिजली से 1000 लोग मारे
जाते हैं.
4. October 1992 में लंडन के जितना बड़ा बर्फ
का तौदा Antarctic से टुट कर अलग हो गया था.
5. प्रकाश को धरती की यात्रा करने के लिए
सिर्फ 0.13 सैकेंड लगेगें.
6. अगर हम प्रकाश की गति से
अपनी नजदीकी गैलैक्सी(Galaxy) पर
जाना चाहे तो हमें 20 साल लगेगें.
7. हवा तब तक आवाज नही करती जब यह
किसी वस्तु के विपरीत न चले.
8. अगर किसी एक आकाश गंगा के सारे तारे नमक
के दाने जितने हो जाए तो वह पूरा का पूरा Olympic swimming pul भर सकते हैं.
9. क्विक सिल्वर या पारा ऐसी एकमात्र धातु है,
जो तरल अवस्था में रहती है और
इतनी भारी होती है कि इस पर
लोहा भी तैरता है।
10. जब पानी से बर्फ बन रही होती तो लगभग 10%
पानी तो उड़ ही जाता है. इसलिए ही हमारे
फ्रिज में Tray (ट्रे) पर पानी जमा हो जाता है.
11. दुनिया के सबसे महंगे पदार्थ की कीमत
सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। इसका नाम जानने
के बाद आप ये सोंच भी नहीं सकेंगे कि वाकई
में इसकी कीमत इतनी ज्यादा होगी। आपमें से
ज्यादातर लोग इसे सोना, चांदी या हीरा मान रहे
होंगे। अगर ऐसा है तो आपको गलतफहमी में है। दुनिया की सबसे महंगा पदार्थ एंटीमैटर (प्रतिपदार्थ) है। प्रतिपदार्थ पदार्थ का एक ऐसा प्रकार है जो प्रतिकणों जैसे पाजीट्रान,
प्रति-प्रोटान, प्रति-न्युट्रान मे
बना होता है. ये प्रति-प्रोटान और प्रति-
न्युट्रान प्रति क्वार्कों मे बने होते हैं.
इसकी कीमत सुनकर आपके होश उड़ जायेंगे। 1
ग्राम प्रतिपदार्थ को बेचकर दुनिया के 100 छोटे-छोटे देशों को खरीदा जा सकता है।
जी हां,1 ग्राम प्रतिपदार्थ की कीमत 31 लाख
25 हजार करोड़ रुपये है। नासा के
अनुसार,प्रतिपदार्थ धरती का सबसे
महंगा मैटीरियल है। 1 मिलिग्राम
प्रतिपदार्थ बनाने में 160 करोड़ रुपये तक लग जाते हैं। जहां यह बनता है, वहां पर
दुनिया की सबसे
अच्छी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है।
इतना ही नहीं नासा जैसे संस्थानों में भी इसे
रखने के लिए एक मजबुत सुरक्षा घेरा है।
कुछ खास लोगों के अलावा प्रतिपदार्थ तक कोई भी नहीं पहुंच सकता है। दिलचस्प है
कि प्रतिपदार्थ का इस्तेमाल अंतरिक्ष में
दूसरे ग्रहों पर जाने वाले विमानों में ईधन
की तरह किया जा सकता है।
12. विश्व की सबसे भारी धातु ऑस्मियम है।
इसकी 2 फुट लंबी, चौड़ी व
ऊँची सिल्ली का वज़न एक हाथी के बराबर
होता है।
13. नाभिकीय भट्टियों में प्रयुक्त गुरु-जल
विश्व का सबसे महँगा पानी है। इसके एक
लीटर का मूल्य लगभग 13,500 रुपये होता है।
14. शरीर पर लगाए जाने वाले सुगंधित पाउडर
को टैल्कम पाउडर इसलिए कहते हैं
क्योंकि वह ‘टैल्क’ नामक पत्थर से
बनाया जाता है।
15. वैज्ञानिकों ने बताया है कि मुर्गी अंड़े
से पहले आई थी क्योंकि वह प्रोटीन
जो अंड़ो के cells को बनाता है केवल
मुर्गीयों में ही पाया जाता है.

16. 1894 में जो सबसे पहला कैमरा बना था उससे
आपको अपनी फोटो खिचवाने के लिए उसके
सामने 8 घंटे तक बैठना पड़ेगा.
17. नील आर्मस्ट्राँग ने सबसे पहले
अपना बाँया पैर चँद्रमा पर रखा था और उस समय
उनके दिल की धड़कन 156 बार प्रति मिनट
थी.
18. अब तक का सबसे बड़ा ज्ञात तारा Canis Majoris
(केनिस मीजोरिस) है. यह इतना बड़ा है
कि इसमें 7 000 000 000 000 000
पृथ्वीयाँ समा सकती हैं. दुसरे शब्दों में अगर
पृथ्वी का आकार अक मटर के दाने जितना क
दिया जाए तो Canis Majoris का व्यास(diameter) 3 किलोमीटर होगा.
19. सूर्यमंडल के बाहर सबसे पहले खोजा जाने
वाला ग्रह 1990 में खोजा गया था. हमारे ब्रहाम्ण्ड में लगभग 40*10 21 ग्रह हैं. पर अबी तक सिर्फ 800 ग्रह ही खोजे हए हैं.
20. जैसा के ऊपर बताया हया है कि सबसे
बड़ा ज्ञात तारा केनिस मीजोरिम है. इसका अर्धव्यास हमारे सुर्य से 600
हुना ज्यादा है जबकि वजन(द्रव्यमान) सिर्फ
30 गुना ज्यादा.
21. हमारे सुर्यमंडल पर सबसे ऊँची चोटी ओलंपस
मॉन्स है जो कि मंगल ग्रह पर स्थित है.
इसके आधार का घेराव लगभग 600 किलोमीटर
है ओर इसकी ऊँचाई 26 किलोमीटर है. माउंट
ऐवरेस्ट की ऊँचाई 8.848 किलोमीटर है.
22. बृहस्पति का गेनीमेड चंन्द्रमा सुर्यमंडल
में एकलौती वस्तु है जो कि किसी ग्रह से
बड़ी है. गेनीमेड का आकार बुद्ध ग्रह से
ज्यादा है.
23. किसी तारे की मौत एक सुपरनोवा धमाके से
होती है. इस धमाके के कारण पैदा होने
वाली वाली उर्जा हमारे सुर्य के जीवन काल
दौरान पैदा होने वाली उर्जा से कई लाख
गुना ज्यादा होती है.
24. हम नंगी आँख से रात को लगभग 6,000
तारों को देख सकते हैं. अगर हम दुरबीन
का प्रयोग करें तो 50,000 देख सकते हैं.
जबकि हमारी आकाशगंगा में 400 तारें हैं.
25. न्युट्रॉन तारे इतने घने होते हैं
कि उनका आकार तो एक गोल्फ बाल
जितना होता है मगर द्रव्यमान(वज़न) 90 अरब
किलोग्राम होता है.
26. अगर धरती का आकार एक मटर जितना कर दें
तो बृहस्पति इससे 300 मीटर दूर होगा और
पलुटो 2.5 किलोमीटर . मगर
पलुटो आपको दिखेगा नही क्योंकि तब
इसका आकार एक बैकटीरीया जितना होगा.

बुधवार, 14 सितंबर 2016

7:56:00 pm

Mahatma gandi ke 33 fact

M.K gandi

fact In Hindi

 

“मजबूरी का नाम महात्मा गांधी ” यह काफ़ी पुरानी कहावत हैं. सबको पता है कि कोई भी बात बिना वजह प्रचलित नही होती। समझ तो आप गए ही होंगे। चलिए अब आगे बढ़ते है, 2 अक्टूबर के दिन 1869 में गांधी जी का जन्म हुआ था। सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी का नाम इतिहास के पन्नों में सदा के लिए अमर है. गांधी सिर्फ देश में ही नही विदेशों में भी प्रसिद्ध रहे है। आज 30 जनवरी के दिन 1948 में नत्थू राम गोडसे ने गोली मारकर गांधी की हत्या कर दी। आइये पढ़ते है वो “Mahatma Gandhi in Hindi” जो आप शायद नही जानते।

Facts about Mahatma Gandhi In Hindi
महात्मा गांधी के बारे में रोचक तथ्य

1. महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) जन्म से बहादुर और बोल्ड नेता नहीं थे। बल्कि उन्होंने अपनी आत्मकथा में स्वयं लिखा है कि बचपन में वह इतने शर्मीले थे वह स्कूल से भाग जाते थे ताकि उन्हें किसी से बात न करनी पड़े।

2. संयुक्त राष्ट्र ने गांधी जी के जन्म दिन 2 अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस (world non-violence day) घोषित किया है।

3. महात्मा गांधी को महात्मा की उपाधि रवीन्द्र नाथ टैगोर ने दी थी और रवीन्द्र नाथ टैगोर को गुरुदेव की उपाधि गांधी जी ने दी थी।

4. सन 1930 में उन्हें अमेरिका की टाइम मैगजीन ने “Man Of the Year” का पुरुस्कार दिया था।

5. महात्मा गांधी अपने जीवन में कभी अमेरिका नहीं गए। और ना ही कभी एयर प्लेन में बैठे।

6. गांधीजी चाहते तो भगत सिँह की फांसी रोक सकते थे पर कई लोगों का यह मानना है कि गांधीजी ने भगत सिंह के केस पर कभी गंभीरता दिखाई ही नहीं।

7. सन 1931 की इंग्लैंड यात्रा के दौरान गांधी जी ने पहली बार रेडियो पर अमेरिका के लिए भाषण दिया। रेडियो पर उनके पहले शब्द थे “क्या मुझे इस माइक्रोफोन के अंदर बोलना पड़ेगा?” “Do I have to speak into this thing?”

8. एक बार गांधी जी को टिकट होने के बावजूद एक अंग्रेज और टिकट कलेक्टर ने “काला” होने के कारण ट्रेन से धक्का मार कर उतार दिया था। यह उनका किसी अंग्रेज के साथ सबसे कड़वा अनुभव था।

9. एक बार गांधी जी का जूता चलती ट्रेन में से नीचे गिर गया। उन्होंने तुरंत अपना दुसरा जूता भी उतार कर ट्रेन फेंक दिया। पूछने पर उन्होंने कहा “एक जूता न तो मेरे काम आएगा न ही उसके जिसे मेरा दूसरा जूता मिलेगा। कम से कम अब वह आदमी तो दोनों जूते पहन सकेगा जिसे मेरे दोनों जूते मिलेंगे”।

10. गांधी जी ने जब अपनी क़ानून की पढ़ाई ख़त्म कर इंग्लैंड में वकालत शुरू की तो वह पूरी तरह असफल साबित हुए। यहां तक कि अपने पहले केस में उनकी टांगें काम्पने लगीं थी और वह पूरी बहस किये बिना ही बैठ गए थे और केस हार गए।

11. दक्षिण अफ्रीका में वह बहुत सफल वकील बने और उनकी आमदनी दक्षिण अफ्रीका में 15000 डॉलर सालाना तक हो गई थी। जरा सोचिये, 99% भारतीयों की सालाना आय आज भी इससे कम है !

12. महात्मा गांधी को “राष्ट्रपिता” (rashtrapita) की उपाधि सुभाष चन्द्र बोस ने दी थी।

13. महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा गुजराती में लिखी थी।

14. गांधी अपनी पत्नी से अक्सर मारपीट करते थे। उन्होंने दशकों तक उनके साथ शारीरिक संबंध भी नहीं रखे।

15. जब गांधी के पिता अपने जीवन की अंतिम सांसें ले रहे थे, तब भी गांधी सेक्स में लीन थे। उन्होंनें अपने आश्रम में रहने वाली दो ब्रिटिश महिलाओं से शादी की थीं।

16. गांधी को अपनी फोटो खींचा जाना बिल्कुल पसंद नहीं था, लेकिन आज़ादी की लड़ाई दौरान वह अकेले शख्स थे, जिनकी फोटो सबसे ज्यादा ली गई थी।

17. गांधी जी को सम्मान देने के लिए एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स गोल चश्मा पहनते थे।

18. गांधी अपने दोस्त हिटलर को पत्र लिखते थे और उनका समर्थन भी करते थे।

19. गांधी जी स्वदेशी के बहुत कट्टर समर्थक थे, किन्तु उनका पहला डाक टिकट स्विट्जरलैंड में छपवाया गया था।

20. गांधी जी अपने नकली दांत अपनी धोती में बाँध कर रखते थे। वह उन्हें केवल खाना खाते समय ही लगाया करते थे।

21. गांधी जी को दो चीज़ों की बहुत चिंता रहती थी। पहली उनकी हैंडराइटिंग और दूसरी मसाज कराना। उन्हें दूसरों से मसाज कराना बहुत अच्छा लगता था।

22. गांधी अपनी 12 वर्षीय भतीजी और एक अन्य महिला के साथ ‘न्यूड’ सोते थे। इस पर गांधी जी का तर्क था कि वे अपनी मर्दानगी को नियंत्रित करने के लिए ऐसा करते थे।

23. गांधी के बेटे ने उन्हें छोड़ दिया था और इस्लाम धर्म अपना लिया था।

24. जिस अंग्रेजी सरकार के खिलाफ गांधीजी ने आंदोलन किया उसी अंग्रेजी सरकार ने महात्मा गांधी की मौत 21 साल बाद उनके सम्मान में स्टांप जारी किया था।

25. 1999 में गांधी जी को Times Magzine द्वारा Albert Einstein के बाद 19वीं सदी का दूसरा सबसे प्रभावशाली व्यक्ति चुना गया।

26. स्वतंत्रता दिवस की रात गांधी जी नेहरू जी का भाषण सुनने के लिए मौजूद नहीं थे, उस दिन गांधी जी उपवास पर थे।

27. भारत की स्वंत्रता प्राप्ति के पश्चात कुछ पत्रकार गाँधी जी के पास आए और उनसे अंग्रेजी में बात करने लगे. मगर गाँधी जी ने सभी को रोका और कहा कि, “मेरा देश अब आजाद हो गया है, अब मैं हमारी हिन्दी भाषा ही बोलूँगा।

28. अपनी मौत से एक दिन पहले महात्मा गांधी Congress Party को खत्म करने पर विचार कर रहे थे।

29. गांधी जी को जीवन में 5 बार नोबल पुरूस्कार के लिए नामांकित किया गया था। किन्तु 1948 में पुरूस्कार मिलने से पहले ही उनकी हत्या हो गई। फलस्वरूप नोबल कमेटी ने पुरुस्कार उस साल किसी को भी नहीं दिया।

30. गांधी जी समय के बेहद पाबंद थे। उनकी कुछ संपत्ति में से एक, एक डॉलर की घड़ी थी। 30 जनवरी, 1948 को जिस दिन गाँधी जी की हत्या कर दी गई थी, वे बस इसलिए परेशान थे की एक नियमित प्रार्थना सभा के लिए वे दस मिनट देरी से आ रहे थे।

31. मूंगफली खाने के बाद गोडसे ने गांधी को एक के बाद एक तीन गोलियां मारी थी। अंतिम समय में गांधीजी के मुंह से निकला, “राम…..रा…..म.

32. गांधी जी की मृत्यु पर पंडित नेहरु जी ने रेडियो द्वारा राष्ट्र को संबोधित किया और कहा “राष्ट्रपिता अब नहीं रहे“।

33. जिस वाहन में 1948 में महात्मा गांधी को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया था वही वाहन सन 1997 में मदर टेरेसा की अंतिम यात्रा के लिए इस्तेमाल किया गया था।

7:51:00 pm

Fact of 33 in your sun

” सूरज ” की यह 33 बातें आप नही जानते होंगे ! Sun in Hindi

About Sun in Hindi – सूरज के बारे में जानकारी



1. चाहे दिन हो जा रात आप जब भी यह तथ्य पढ़ रहे हो जा कभी भी कुछ कर रहे हो तो सुर्य द्वारा छोड़े गए 10 लाख अरब (1013) न्युट्रान आप के शरीर से गुजर रहे होते हैं।

2. सुर्य मंण्डल का 99.24% वजन सुर्य का है।

3. अगर सु्र्य का आकार एक फुटबाल जितना औरबृहस्पति का गोल्फ बाल जितना कर दिया जाए तो धरती का आकार एक मटर से भी कम होगा।

4. प्रकाश सुरज से धरती पर आने के लिए 8 मिनट 17 सैकेंड लेता है।

5. संस्कृत भाषा में सुर्य के कुल 108 नाम हैं।

6. अगर मान ले कि आप सुर्य की सतह पर रहते हैं तो आप को धरती पर आने कि लिए जो रॉकेट त्यार करना होगा उसकी शुरूआती गति 618 किलोमीटर प्रति सैंकेड होनी चाहिए।

7. सुर्य 74 प्रतीशत हाईड्रोजन और 24 प्रतीशत हीलियम से बना है और बाकी का हिस्सा कई भारी तत्वों जैसे ऑक्सीजन, कार्बन, लोहे और नीयोन से बना है।

8. सुर्य की बाहरी सतह का तापमान 5500 डिगरी सेलसीयस है जबकि अंदरूनी भाग का तापमान 1 करोड 31 लाख डिगरी सेलसीयस है।

9. सुर्य भारी मात्रा में सौर वायु उत्पन्न करता है जिसमें इलेक्ट्रॉन और प्रोटान जैसे कण होते है। यह वायु इतनी तेज (लगभग 450 किलोमीटर प्रति सैकेंड) और शक्तिशाली होती है कि इसमें मौजुद इनेक्ट्रॉन और प्रोटान सुर्य के शक्तिशाली गुरूत्व से भी बाहर निकल जाते हैं।

10. धरती जैसे शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र वाले ग्रह ऐसे कणों को धरती के पास पहुँचने से पहले ही मोड़ देते हैं। (ध्यान रहें चुंबकीय क्षेत्र मोड़ता है वायुमंडल नही।)

सुर्य ग्रहण – Sun Eclipse

11. सुर्य ग्रहण तब होता है जब चाँद, धरती और सुर्य के मध्य आ जाए। यह स्थिती ज्यादा से ज्यादा 20 मिनट तक रहती है।

12. धरती पर हर जगह 360 दिनो में एक बार सुर्य ग्रहण जरूर दिखता है। साल में ज्यादा मे ज्यादा 5 बार ही सुर्य ग्रहण लगता है। सुर्य ग्रहण 7 मिनट 40 सैंकेड तक रहता है मगर संम्पूर्ण सुर्य ग्रहण 20 मिनट तक चलता है।

13. सुर्य की द्रव्यमान (वजन) लगभग 1.989*1030 किलोग्राम है।

14. हर सैकेंड सुर्य में 7 करोड़ टन हाईड्रोजन , 6 करोड़ 95 लाख टन हीलियम में बदलती है और बची 5 लाख टन गामा किरणों में बदल जाती है।

15. हर सैकेड सुर्य का द्रव्यमान 50 लाख टन कम हो जाता है।

16. सुर्य के अंदरूनी भाग का दबाब धरती के वायुमंडल के दबाब से 340 अरब गुना ज्यादा है। सुर्य के अंदरूनी भाग की घनता, धरती पर मौजुद पानी की घनता से 150 गुना ज्यादा है।

17. अगर सुर्य के केंद्र से एक पनीर के टुकड़े जितने भाग को धरती की सतह पर रख दिया जाए तो कोई भी चट्टान जा ओर कोई चीज इसे धरती के 150 किलोमीटर अंदर तक घसने से नही रोक सकती ।

18. सुर्य की सतह का क्षेत्रफल धरती के क्षेत्रफल से 11990 गुना ज्यादा है।

19. सुर्य का गुरूत्वार्कष्ण धरती से 28 गुना ज्यादा है। मतलब कि अगर धरती पर आपका वजन 60 किलो है तो सुर्य पर यह 1680 किलो होगा।

20. धरती की तरह सुर्य ठोस नही है। यह सारा का सारा गैसो का बना हुआ है।

21. सुर्य का गुरूत्व इतना शक्तिशाली है कि 6 अरब किलोमीटर दूर स्थित पलुटो ग्रह भी इसके गुरूत्व के कारण अपनी कक्षा में घूम रहा है।

22. अगर कोई वस्तु सूर्य के 20 लाख 22 हज़ार किलोमीटर के दायरे में आती है तो सूर्य उसे अपनी ओर खींच लेगा।

23. प्रकाश सुर्य से प्लुटो तक पहुँचने में 5 घंटे 30 मिनट लेता है।

24. जैसे हमारी धरती अपने धुरे के समक्ष 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है ऐसे ही सुर्य अपनी धूरे के समक्ष 25 दिन में एक चक्कर पूरा करता है।

25. जबसे सुर्य का जन्म हुआ है इसने सिर्फ 20 बार ही आकाशगंगा का चक्कर काटा है।

26. सुर्य के एक वर्ग सैंटीमीटर से जितनी उर्जा पैदा होती है इतनी उर्जा 100 वाट के 64 बल्बो को जगाने के लिए काफी होगी।

27. सुर्य की जितनी उर्जा धरती पर पहुँचती है इतनी उर्जा संम्पूर्ण मानवो द्वारा खप्त की उर्जा से 6000 गुना ज्यादा होती है।

28. जितनी उर्जा 30 दिन में धरती को सुर्य द्वारा मिलती है इतनी उर्जा मानवो द्वारा पिछले 40,000 साल से खप्त उर्जा से कहीं ज्यादा है।

29. अगर मान लें कि सुर्य की चमक एक दिन धरती पर न पुँहचे तो धरती कुछ ही घंटो में बर्फ की तरह पूरी तरह से जम जाएगी सारी धरती उत्तरी ओर दक्ष्णी ध्रव जैसी बन जाएगी।

30. नार्वे एकलोता ऐसा क्षेत्र है जहां सुर्य लगातार साढ़े 3 महीने तक चमकता रहता है।

31. 1 अरब 10 लाख साल बाद सुर्य अब से 10 प्रतीशत ज्यादा चमकने लगेगा। धरती का वायुमंडल और इसकी नमी अत्यधिक तापमान के कारण अंतरिक्ष में उड़ जाएगी।

32. अब से 5 अरब साल बाद सुर्य अब से 40 प्रतीशत ज्यादा चमकने लगेगा। सारे सागर , महासागर और नदीयों का पानी जलवासप बन कर अंतरिक्ष में उड़ जाएगें।

33. अब से 5 अरब 40 करोड़ साल बाद सुर्य में सारी हाईड्रोजन खत्म हो जाएगी और यह खत्म होना शुरू हो जाएगा।

7:47:00 pm

लुई ब्रेल

लुई

लुई ब्रेल

लुई ब्रेल

अंधों के लिये ब्रेल लिपि का निर्माण करने के लिये लुई ब्रेलजगप्रसिद्ध हैं। फ्रांस में जन्मे लुई ब्रेल अंधों के लिए ज्ञान के चक्षु बन गए। ब्रेल लिपि के निर्माण से नेत्रहीनों की पढ़ने की कठिनाई को मिटने वाले लुई स्वयम भी नेत्र हीन थे।

जीवनीसंपादित करें

लुइस ब्रेल का जन्म 4 जनवरी 1809 मे फ्रांस के छोटे से ग्राम कुप्रे में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। इनके पिता साइमन रेले ब्रेल शाही घोडों के लिये काठी और जीन बनाने का कार्य किया करते थें। पारिवारिक आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त आर्थिक संसाधन नही होने के कारण साइमन केा अतिरिक्त मेहनत करनी होती थी इसीलिये जब बालक लुइस मात्र पांच वर्ष के हुये तो उनके पिता ने उसे भी अपने साथ घोड़ों के लिये काठी और जीन बनाने के कार्य में लगा लिया। अपने स्वभाव के अनुरूप पांच वर्षीय बालक अपने आस पास उपलब्ध वस्तुओं से खेलने में अपना समय बिताया करता था इसलिये बालक लुइस के खेलने की वस्तुये वही थीं जो उसके पिता द्वारा अपने कार्य में उपयोग की जाती थीं जैसे कठोर लकड़ी, रस्सी, लोहे के टुकडे, घोड़े की नाल, चाकू और काम आने वाले लोहे के औजार। किसी पांच वर्षीय बालक का अपने नजदीक उपलब्ध वस्तुओं के साथ खेलना और शरारतों में लिप्त रहना नितांत स्वाभाविक भी था। एक दिन काठी के लिये लकडी को काटते में इस्तेमाल किया जाने वाली चाकू अचानक उछल कर इस नन्हें बालक की आंख में जा लगी और बालक की आँख से खून की धारा बह निकली। रोता हुआ बालक अपनी आंख को हाथ से दबाकर सीधे घर आया और घर में साधारण जडी लगाकर उसकी आँख पर पट्टी कर दी गयी। शायद यह माना गया होगा कि छोटा बालक है सेा शीघ्र ही चोट स्वतः ठीक हो जायेगी। बालक लुइस की आंख के ठीेक होने की प्रतीक्षा की जाने लगी। कुछ दिन बाद बालक लुइस ने अपनी दूसरी आंख से भी कम दिखलायी देने की शिकायत की परन्तु यह उसके पिता साइमन की साघन हीनता रही होगी अथवा लापरवाही जिसके चलते बालक की आँख का समुचित इलाज नहीं कराया जा सका और धीरे धीरे वह नन्हा बालक आठ वर्ष का पूरा होने तक पूरी तरह दृष्टि हीन हो गया। रंग बिरंगे संसार के स्थान पर उस बालक के लिये सब कुछ गहन अंधकार में डूब गया। अपने पिता के चमडे के उद्योग में उत्सुकता रखने वाले लुई ने अपनी आखें एक दुर्घटना में गवां दी। यह दुर्घटना लुई के पिता की कार्यशाला में घटी। जहाँ तीन वर्ष की उम्र में एक लोहे का सूजा लुई की आँख में घुस गया।

ब्रेल लिपि का विकाससंपादित करें

यह बालक कोई साधरण बालक नहीं था। उसके मन में संसार से लडने की प्रबल इच्छाशक्ति थी। उसने हार नहीं मानी और फा्रंस के मशहूर पादरी बैलेन्टाइन की शरण में जा पहुंचा। पादरी बैनेन्टाइन के प्रयासों के चलते 1819 में इस दस वर्षीय बालक को ‘ रायल इन्स्टीट्यूट फार ब्लाइन्डस् ’ में दाखिला मिल गया। यह वर्ष 1821 था। बालक लुइस अब तक बारह बर्ष का हो चुका था। इसी दौरान विद्यालय में बालक लुइस केा पता चला कि शाही सेना के सेवानिवृत कैप्टेन चार्लस बार्बर ने सेना के लिये ऐसी कूटलिपि का विकास किया है जिसकी सहायता से वे टटोलकर अंधेरे में भी संदेशों के पढ सकते थे। कैप्टेन चार्लस बार्बर का उद्देश्य युद्व के दौरान सैनिकों को आने वाली परेशानियों को कम करना था। बालक लुइस का मष्तिष्क सैनिकों के द्वारा टटोलकर पढ़ी जा सकने वाली कूटलिपि में दृष्ठिहीन व्यक्तियो के लिये पढने की संभावना ढूंढ रहा था। उसने पादरी बैलेन्टाइन से यह इच्छा प्रगट की कि वह कैप्टेन चार्लस बार्बर से मुलाकात करना चाहता है। पादरी ने लुइस की कैप्टेन से मुलाकात की व्यवस्था करायी। अपनी मुलाकात के दौरान बालक ने कैप्टेन के द्वारा सुझायी गयी कूटलिपि में कुछ संशोधन प्रस्तावित किये। कैप्टेन चार्लस बार्बर उस अंधे बालक का आत्मविश्वाश देखकर दंग रह गये। अंततः पादरी बैलेन्टाइन के इस शिष्य के द्वारा बताये गये संशोधनों को उन्होंने स्वीकार किया।

ब्रेल लिपि मान्यतासंपादित करें

कालान्तर में स्वयं लुइस ब्रेल ने आठ वर्षो के अथक परिश्रम से इस लिपि में अनेक संशोधन किये और अंततः 1829 में छह बिन्दुओ पर आधारित ऐसी लिपि बनाने में सफल हुये। लुइस ब्रेल के आत्मविश्वाश की अभी और परीक्षा होना बाकी था इसलिये उनके द्वारा आविष्कृत लिपि को तत्कालीन शिक्षाशाष्त्रियों द्वारा मान्यता नहीं दी गयी और उसका माखौल उडाया गया। सेना के सेवानिवृत कैप्टेन चार्लस बार्बर के नाम का साया लगातार इस लिपि पर मंडराता रहा और सेना के द्वारा उपयोग में लाये जाने के कारण इस लिपि केा सेना की कूटलिपि ही समझा गया परन्तु लुइस ब्रेल ने हार नहीं मानी और पादरी बैलेन्टाइन के संवेदनात्मक आर्थिक एवं मानसिक सहयोग से इस शिष्य ने अपनी अविष्कृत लिपि को दृष्ठि हीन व्यक्तियों के मध्य लगातार प्रचारित किया। उन्होंने सरकार से प्रार्थना की कि इसे दृष्ठिहीनों की भाषा के रूप में मान्यता प्रदान की जाय। यह लुइस का दुर्भाग्य रहा कि उनके प्रयासों को सफलता नहीं मिल सकी और तत्कालीन शिक्षाशाष्त्रियों द्वारा इसे भाषा के रूप में मान्यता दिये जाने योग्य नहीं समझा गया। अपने प्रयासों केा सामाजिक एवं संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिये संर्घषरत लुइस 43 वर्ष की अवस्था में अंततः 1852 में जीवन की लडाई से हार गये परन्त् उनका हौसला उनकी मृत्यु के बाद भी नहीं मरा।

मृत्योपरान्त राष्ट्रीय सम्मानसंपादित करें

उनका देहान्त ६ जनवरी १९५२ को हुआ। लुइस ब्रेल द्वारा अविष्कृत छह बिन्दुओ पर आधारित लिपि उनकी मृत्यु के उपरान्त दृष्ठिहीनों के मध्य लगातार लोकप्रिय होती गयी। लुइस की मृत्यु की घटना के बाद शिक्षाशाष्त्रियों द्वारा उनके किये गये कार्य की गम्भीरता को समझा जाने लगा और दृष्ठिहीनों के मध्य लगातार मान्यता पाती जा रही लिपि के प्रति अपने पूर्वाग्रहपूर्ण दकियानूसी विचारों से बाहर निकलतें हुये इसे मान्यता प्रदान करने की दिशा में विचारित किया गया। अंततः लुइस की मृत्यु के पूरे एक सौ वर्षों के बाद फ्रांस में 20 जून 1952 का दिन उनके सम्मान का दिवस निर्धारित किया गया। इस दिन उनके ग्रह ग्राम कुप्रे में सौ वर्ष पूर्व दफनाये गये उनके पार्थिव शरीर के अवशेष पूरे राजकीय सम्मान के साथ बाहर निकाले गये। उस दिन जैसे लुइस के ग्राम कुप्रे में उनका पुर्नजन्म हुआ। स्थानीय प्रशासन तथा सेना के आला अधिकारी जिनके पूर्वजों ने लुइस केे जीवन काल मे उनकेा लगातार उपेक्षित किया तथा दृष्ठिहीनों के लिये उनकी लिपि को गम्भीरता से न लेकर उसका माखौल उडाया अपने पूर्वजों के द्वारा की गयी गलती की माफी मांगने के लिये उनकी समाधि के चारों ओर इकट्ठा हुये। लुइस के शरीर के अवशेष ससम्मान निकाले गये। सेना के द्वारा बजायी गयी शोक धुन के बीच राष्ट्रीय ध्वज में उन्हें पुनः लपेटा गया और अपनी ऐतिहासिक भूल के लिये उत्खनित नश्वर शरीर के अंश के सामने समूचे राष्ट् ने उनसे माफी मांगी। राष्ट्रीय धुन बजायी गयी और इस सब के उपरान्त धर्माधिकारियों के द्वारा दिये गये निर्देशन के अनुरूप लुइस से ससम्मान चिर निद्रा में लीन होने प्रार्थना की गयी और इसके लिये बनाये गये स्थान में उन्हें राष्ट्रीय सम्मान के साथ पुनः दफनाया गया। सम्पूर्ण वातावरण ऐसा अनुभव दे रहा था जैसे लुइस पुनः जीवित हो उठे है।


भारत सरकार द्वारा सम्मानसंपादित करें

चित्र:Post luis.JPG
भारत सरकार ने सन 2009 में लुइस ब्रेल के सम्मान में डाक टिकिट जारी किया है

इस प्रकार एक राष्ट के द्वारा अपनी ऐतिहासिक भूल का प्रायश्चित किया गया परन्तु लूइस द्वारा किये गये कार्य अकेले किसी राष्ट्र के लिये न होकर सम्पूर्ण विश्व की दृष्ठिहीन मानव जाति के लिये उपयोगी थे अतः सिर्फ एक राष्ट् के द्वारा सम्मान प्रदान किये जाने भर से उस मनीषी को सच्ची श्रद्वांजलि नहीं हो सकती थी। विगत वर्ष 2009 में 4 जनवरी को जब लुइस ब्रेल के जन्म को पूरे दो सौ वर्षों का समय पूरा हुआ तो लुई ब्रेल जन्म द्विशती के अवसर पर हमारे देश ने उन्हें पुनः पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जब इस अवसर पर उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया।

यह शायद पहला अवसर नहीं है जब मानव जाति ने किसी महान आविष्कारक के कार्य को उसके जीवन काल में उपेक्षित किया और जब वह महान आविष्कारक नहीं रहे तो उनके कार्य का सही मूल्यांकन तथा उन्हें अपेक्षित सम्मान प्रदान करते हुये अपनी भूल का सुधार किया। ऐसी परिस्थितियां सम्पूर्ण विश्व के समक्ष अक्सर आती रहती हैं जब किसी महान आत्मा के कार्य को समय रहते ईमानदारी से मूल्यांकित नहीं किया जाता तथा उसकी मृत्यु के उपरान्त उसके द्वारा किये गये कार्य का वास्तविक मूल्यांकन हो पाता है। ऐसी भूलों के लिये कदाचित परिस्थितियों को निरपेक्ष रूप से न देख पाने की हमारी अयोग्यता ही हो सकती है। ब्रेल

लुई ब्रेल

अंधों के लिये ब्रेल लिपि का निर्माण करने के लिये लुई ब्रेलजगप्रसिद्ध हैं। फ्रांस में जन्मे लुई ब्रेल अंधों के लिए ज्ञान के चक्षु बन गए। ब्रेल लिपि के निर्माण से नेत्रहीनों की पढ़ने की कठिनाई को मिटने वाले लुई स्वयम भी नेत्र हीन थे।

जीवनीसंपादित करें

लुइस ब्रेल का जन्म 4 जनवरी 1809 मे फ्रांस के छोटे से ग्राम कुप्रे में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। इनके पिता साइमन रेले ब्रेल शाही घोडों के लिये काठी और जीन बनाने का कार्य किया करते थें। पारिवारिक आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त आर्थिक संसाधन नही होने के कारण साइमन केा अतिरिक्त मेहनत करनी होती थी इसीलिये जब बालक लुइस मात्र पांच वर्ष के हुये तो उनके पिता ने उसे भी अपने साथ घोड़ों के लिये काठी और जीन बनाने के कार्य में लगा लिया। अपने स्वभाव के अनुरूप पांच वर्षीय बालक अपने आस पास उपलब्ध वस्तुओं से खेलने में अपना समय बिताया करता था इसलिये बालक लुइस के खेलने की वस्तुये वही थीं जो उसके पिता द्वारा अपने कार्य में उपयोग की जाती थीं जैसे कठोर लकड़ी, रस्सी, लोहे के टुकडे, घोड़े की नाल, चाकू और काम आने वाले लोहे के औजार। किसी पांच वर्षीय बालक का अपने नजदीक उपलब्ध वस्तुओं के साथ खेलना और शरारतों में लिप्त रहना नितांत स्वाभाविक भी था। एक दिन काठी के लिये लकडी को काटते में इस्तेमाल किया जाने वाली चाकू अचानक उछल कर इस नन्हें बालक की आंख में जा लगी और बालक की आँख से खून की धारा बह निकली। रोता हुआ बालक अपनी आंख को हाथ से दबाकर सीधे घर आया और घर में साधारण जडी लगाकर उसकी आँख पर पट्टी कर दी गयी। शायद यह माना गया होगा कि छोटा बालक है सेा शीघ्र ही चोट स्वतः ठीक हो जायेगी। बालक लुइस की आंख के ठीेक होने की प्रतीक्षा की जाने लगी। कुछ दिन बाद बालक लुइस ने अपनी दूसरी आंख से भी कम दिखलायी देने की शिकायत की परन्तु यह उसके पिता साइमन की साघन हीनता रही होगी अथवा लापरवाही जिसके चलते बालक की आँख का समुचित इलाज नहीं कराया जा सका और धीरे धीरे वह नन्हा बालक आठ वर्ष का पूरा होने तक पूरी तरह दृष्टि हीन हो गया। रंग बिरंगे संसार के स्थान पर उस बालक के लिये सब कुछ गहन अंधकार में डूब गया। अपने पिता के चमडे के उद्योग में उत्सुकता रखने वाले लुई ने अपनी आखें एक दुर्घटना में गवां दी। यह दुर्घटना लुई के पिता की कार्यशाला में घटी। जहाँ तीन वर्ष की उम्र में एक लोहे का सूजा लुई की आँख में घुस गया।

ब्रेल लिपि का विकाससंपादित करें

यह बालक कोई साधरण बालक नहीं था। उसके मन में संसार से लडने की प्रबल इच्छाशक्ति थी। उसने हार नहीं मानी और फा्रंस के मशहूर पादरी बैलेन्टाइन की शरण में जा पहुंचा। पादरी बैनेन्टाइन के प्रयासों के चलते 1819 में इस दस वर्षीय बालक को ‘ रायल इन्स्टीट्यूट फार ब्लाइन्डस् ’ में दाखिला मिल गया। यह वर्ष 1821 था। बालक लुइस अब तक बारह बर्ष का हो चुका था। इसी दौरान विद्यालय में बालक लुइस केा पता चला कि शाही सेना के सेवानिवृत कैप्टेन चार्लस बार्बर ने सेना के लिये ऐसी कूटलिपि का विकास किया है जिसकी सहायता से वे टटोलकर अंधेरे में भी संदेशों के पढ सकते थे। कैप्टेन चार्लस बार्बर का उद्देश्य युद्व के दौरान सैनिकों को आने वाली परेशानियों को कम करना था। बालक लुइस का मष्तिष्क सैनिकों के द्वारा टटोलकर पढ़ी जा सकने वाली कूटलिपि में दृष्ठिहीन व्यक्तियो के लिये पढने की संभावना ढूंढ रहा था। उसने पादरी बैलेन्टाइन से यह इच्छा प्रगट की कि वह कैप्टेन चार्लस बार्बर से मुलाकात करना चाहता है। पादरी ने लुइस की कैप्टेन से मुलाकात की व्यवस्था करायी। अपनी मुलाकात के दौरान बालक ने कैप्टेन के द्वारा सुझायी गयी कूटलिपि में कुछ संशोधन प्रस्तावित किये। कैप्टेन चार्लस बार्बर उस अंधे बालक का आत्मविश्वाश देखकर दंग रह गये। अंततः पादरी बैलेन्टाइन के इस शिष्य के द्वारा बताये गये संशोधनों को उन्होंने स्वीकार किया।

ब्रेल लिपि मान्यतासंपादित करें

कालान्तर में स्वयं लुइस ब्रेल ने आठ वर्षो के अथक परिश्रम से इस लिपि में अनेक संशोधन किये और अंततः 1829 में छह बिन्दुओ पर आधारित ऐसी लिपि बनाने में सफल हुये। लुइस ब्रेल के आत्मविश्वाश की अभी और परीक्षा होना बाकी था इसलिये उनके द्वारा आविष्कृत लिपि को तत्कालीन शिक्षाशाष्त्रियों द्वारा मान्यता नहीं दी गयी और उसका माखौल उडाया गया। सेना के सेवानिवृत कैप्टेन चार्लस बार्बर के नाम का साया लगातार इस लिपि पर मंडराता रहा और सेना के द्वारा उपयोग में लाये जाने के कारण इस लिपि केा सेना की कूटलिपि ही समझा गया परन्तु लुइस ब्रेल ने हार नहीं मानी और पादरी बैलेन्टाइन के संवेदनात्मक आर्थिक एवं मानसिक सहयोग से इस शिष्य ने अपनी अविष्कृत लिपि को दृष्ठि हीन व्यक्तियों के मध्य लगातार प्रचारित किया। उन्होंने सरकार से प्रार्थना की कि इसे दृष्ठिहीनों की भाषा के रूप में मान्यता प्रदान की जाय। यह लुइस का दुर्भाग्य रहा कि उनके प्रयासों को सफलता नहीं मिल सकी और तत्कालीन शिक्षाशाष्त्रियों द्वारा इसे भाषा के रूप में मान्यता दिये जाने योग्य नहीं समझा गया। अपने प्रयासों केा सामाजिक एवं संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिये संर्घषरत लुइस 43 वर्ष की अवस्था में अंततः 1852 में जीवन की लडाई से हार गये परन्त् उनका हौसला उनकी मृत्यु के बाद भी नहीं मरा।

मृत्योपरान्त राष्ट्रीय सम्मानसंपादित करें

उनका देहान्त ६ जनवरी १९५२ को हुआ। लुइस ब्रेल द्वारा अविष्कृत छह बिन्दुओ पर आधारित लिपि उनकी मृत्यु के उपरान्त दृष्ठिहीनों के मध्य लगातार लोकप्रिय होती गयी। लुइस की मृत्यु की घटना के बाद शिक्षाशाष्त्रियों द्वारा उनके किये गये कार्य की गम्भीरता को समझा जाने लगा और दृष्ठिहीनों के मध्य लगातार मान्यता पाती जा रही लिपि के प्रति अपने पूर्वाग्रहपूर्ण दकियानूसी विचारों से बाहर निकलतें हुये इसे मान्यता प्रदान करने की दिशा में विचारित किया गया। अंततः लुइस की मृत्यु के पूरे एक सौ वर्षों के बाद फ्रांस में 20 जून 1952 का दिन उनके सम्मान का दिवस निर्धारित किया गया। इस दिन उनके ग्रह ग्राम कुप्रे में सौ वर्ष पूर्व दफनाये गये उनके पार्थिव शरीर के अवशेष पूरे राजकीय सम्मान के साथ बाहर निकाले गये। उस दिन जैसे लुइस के ग्राम कुप्रे में उनका पुर्नजन्म हुआ। स्थानीय प्रशासन तथा सेना के आला अधिकारी जिनके पूर्वजों ने लुइस केे जीवन काल मे उनकेा लगातार उपेक्षित किया तथा दृष्ठिहीनों के लिये उनकी लिपि को गम्भीरता से न लेकर उसका माखौल उडाया अपने पूर्वजों के द्वारा की गयी गलती की माफी मांगने के लिये उनकी समाधि के चारों ओर इकट्ठा हुये। लुइस के शरीर के अवशेष ससम्मान निकाले गये। सेना के द्वारा बजायी गयी शोक धुन के बीच राष्ट्रीय ध्वज में उन्हें पुनः लपेटा गया और अपनी ऐतिहासिक भूल के लिये उत्खनित नश्वर शरीर के अंश के सामने समूचे राष्ट् ने उनसे माफी मांगी। राष्ट्रीय धुन बजायी गयी और इस सब के उपरान्त धर्माधिकारियों के द्वारा दिये गये निर्देशन के अनुरूप लुइस से ससम्मान चिर निद्रा में लीन होने प्रार्थना की गयी और इसके लिये बनाये गये स्थान में उन्हें राष्ट्रीय सम्मान के साथ पुनः दफनाया गया। सम्पूर्ण वातावरण ऐसा अनुभव दे रहा था जैसे लुइस पुनः जीवित हो उठे है।

भारत सरकार द्वारा सम्मानसंपादित करें

चित्र:Post luis.JPG

भारत सरकार ने सन 2009 में लुइस ब्रेल के सम्मान में डाक टिकिट जारी किया है

इस प्रकार एक राष्ट के द्वारा अपनी ऐतिहासिक भूल का प्रायश्चित किया गया परन्तु लूइस द्वारा किये गये कार्य अकेले किसी राष्ट्र के लिये न होकर सम्पूर्ण विश्व की दृष्ठिहीन मानव जाति के लिये उपयोगी थे अतः सिर्फ एक राष्ट् के द्वारा सम्मान प्रदान किये जाने भर से उस मनीषी को सच्ची श्रद्वांजलि नहीं हो सकती थी। विगत वर्ष 2009 में 4 जनवरी को जब लुइस ब्रेल के जन्म को पूरे दो सौ वर्षों का समय पूरा हुआ तो लुई ब्रेल जन्म द्विशती के अवसर पर हमारे देश ने उन्हें पुनः पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जब इस अवसर पर उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया।

यह शायद पहला अवसर नहीं है जब मानव जाति ने किसी महान आविष्कारक के कार्य को उसके जीवन काल में उपेक्षित किया और जब वह महान आविष्कारक नहीं रहे तो उनके कार्य का सही मूल्यांकन तथा उन्हें अपेक्षित सम्मान प्रदान करते हुये अपनी भूल का सुधार किया। ऐसी परिस्थितियां सम्पूर्ण विश्व के समक्ष अक्सर आती रहती हैं जब किसी महान आत्मा के कार्य को समय रहते ईमानदारी से मूल्यांकित नहीं किया जाता तथा उसकी मृत्यु के उपरान्त उसके द्वारा किये गये कार्य का वास्तविक मूल्यांकन हो पाता है। ऐसी भूलों के लिये कदाचित परिस्थितियों को निरपेक्ष रूप से न देख पाने की हमारी अयोग्यता ही हो सकती है।

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