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शनिवार, 3 सितंबर 2016
आज़म खान ने अपनी ही कौम को दी गाली कहा 80% मुसलमान कुत्ते होते हैं
उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार के कद्दावर नेता आज़म खान को लगता है सुर्ख़ियों में रहने की आदत सी हो गयी हो। चाहे वो उनके बेतुके बयानों से हो या उनकी चोरी हुए भैंसों के कारण हो।
आज़म खान अपने इस बेतुके अंदाज़ से बाज़ नहीं आते। हुआ कुछ यूँ की बुलंदशहर के श्याना में किसी कार्यक्रम में पहुचे आज़म खान ने पास में लगा कही ऐमिम पार्टी के नेता असद्दुदीन ओवैसी का पोस्टर देख लिया और फिर उनके बारे में जमकर भड़ास निकलने लगे, उन्होंने कहा कि ओवैसी आरएसएस और बीजेपी का एजेंट है जो चुनावों में वोट काटने की राजनीती करता है और बीजेपी इसके लिए उसे अछि कीमत भी देती है।
इतना ही नहीं ओवैसी याक तो बात ठीक थी , वो इसके आगे भी नहीं रुके। उन्होंने कहा “80 प्रतिशत मुसलमान कुत्ते हो चुके है, वो ना तो रोज़े रखते है और ना ही सच बोलते है। क्योंकि जो मालिक का नहीं वो कुत्ते से भी बदतर है।”
बलोची मुस्लिम करते हैं हिंगलाज माता की पूजा, मंदिर को बचाने के लिए दे चुके हैं कई बार कुर्बानी
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शुक्रवार, 2 सितंबर 2016
अविश्वसनीय खोज! यह फल कुछ मिनट में ही ठीक कर देता है कैंसर
इन दिनों इंटरनेट पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है कि एक ऐसी दवाई खोजी गयी है कि जो कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को मिनटों में ठीक कर सकती है।
एक जंगली फल के बीज का है ये कमाल
वैज्ञानिकों ने दावा किया है उन्होंने कैंसर की एक प्राकृतिक और जादुई दवा खोज ली है जिससे की ये रोग मिनटों में दूर हो जायेगा। इस बारे में सोशल नेटवर्किंग साइटस पर काफी चर्चा हो रही है। कहा जा रहाहै कि ये चमत्कारी असर एक जंगली फल के बीजों में छुपा है। दरसल कैंसर दूर करने की दवाइयों में EVS-46 का इस्तेमाल होता है जो इस फल के बीजों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
इत्तेफाक से मिली दवा
सबसे खास बात ये है कि ये दवा कैंसर पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों बिलकुल इत्तेफाक से मिल गयी। एक बार ऑस्ट्रेलिया में काम कर रहे शोध कर्ताओं ने देखा कि वहां एक ऑस्ट्रेलियन ब्लशवुड नाम के एक जंगली पेड़ पर कुछ फल लगे हैं और जंगली जानवर जैसे ही इस फल को खाते हैं बीजों को तुरंत थूक देते हैं। जानवरों के इस अजीब व्यवहार की जांच करने के लिए वैज्ञाानिकों ने इन बीजों की जांच की और पाया कि इन में कैंसर नष्ट करने वाले तत्व इतनी ज्यादा मात्रा में हैं कि इन्हें खाने से कैंसर कुछ मिनटों में ठीक हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में होता है ये वृक्ष
कैंसर की इस रामबाण दवा के फलों वाला ये पेड़ उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में होता है। ये एक रेयर वनस्पति है और वहां पर कुछ खाज इलाकों में ही पायी जाती है। यदि इसकी ये चमत्कारिक योग्यता प्रमाणित हो गयी तो निसंदेह ये अमूल्य हो जायेंगे।
खौलते तेल से भरी कड़ाही में बैठता है ये शख्स, वायरल तस्वीरों का स
गरम तेल में हाथ डालकर पकौड़े और मछली तलने वाले तो आपने कई लोग देखे होंगे। लेकिन अगर कोई व्यक्ति खुद ही खोलते तेल में बैठ जाए तो इसे क्या कहेंगे आप? जानिए क्या है वायरल हो रही इन तस्वीरों का सच।
थाईलैंड स्थित नांग बु लपू प्रांत में बौद्ध भिक्षु खोलते तेल में बैठने का कारनामा कर दिखा रहे हैं। ऐसा करते समय बड़ी संख्या में लोग मौजूद होते हैं।
खौलते तेल की कड़ाही में बैठने के बाजवूद इस बौद्ध भिक्षु के शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। ये घंटो तक इसी तरह कड़ाही में बैठ कर ध्यान करते रहते हैं।
बौध भिक्षु द्वारा गरम तेल की कड़ाही में बैठने के दौरान आग की लपटे पूरी कड़ाही को ढक लेती हैं।
लेकिन भिक्षु बिना विचलित हुए अपने ध्यान में मग्न रहते हैं। देखने वाले दांतों तले उंगली दबाते हैं।
लेकिन ये भी माना जा रहा है कि ये भिक्षु शरीर और कड़ाही पर किसी तरह की जड़ी बूटी लगाते हैं। जिसकी वजह से आग का तापमान शरीर पर असर नहीं करता है। देखिए सोशल साइट्स पर वायरल हो रहा वीडियो।
17 महीने से प्रेग्नेंट है ये महिला, क्या बनेगा नया विश्व रिकॉर्ड?
आमतौर पर गर्भवती महिला 9 महीने में अपने बच्चे को जन्म देती है। लेकिन ये जानकर आप चौंक जाएंगे कि एक महिला ने 17 महीने की प्रेग्नेंट होने का दावा किया है। जानिए क्या वजह है कि ये महिला 17 महीने से प्रेग्नेंट है।
चीन की रहने वाली वांग नाम की महिला फरवरी 2015 से प्रेग्नेंट है। प्रेग्नेंट होने के पहले महीने से ही वह डॉक्टरों से जांच करवा रही है।
डॉक्टर ने वांग को 2015 के अंत में बच्चे की डिलीवरी की डेट भी दी थी। लेकिन समय निकलने के बाद घर वाले इस बात से परेशान हो गए की बच्चे का जन्म क्यों नहीं हो रहा।
वांग डॉक्टरों के पास 30 से ज्यादा बार चक्कर लगा चुकी है। ऐसे मे 14 वें हफ्ते में डॉक्टरों ने उसे बताया कि वह उसका सीजेरियन करके बच्चा बाहर नहीं ला सकते। क्योंकि भ्रूण अभी भी परिपक्व नहीं है।
17 महीने बीतने के बाद भी बच्चे के शरीर का निर्माण जारी है। ऐसे में महिला को तब तक इंतजार करना होगा जब तक बच्चे का शरीर पूरी तरह से स्वस्थ न हो जाए। चीन के डॉक्टरों ने 18 वें महीने में बच्चे की डिलीवरी होने का दावा किया है।
फिल्मों में आपने ऐसे कई सीन देखे होंगे जिसमें जज मौत की सजा सुनाने के बाद अपने पेन की निब तोड़ देते हैं लेकिन इसके पीछे क्या राज होता है ये आपको नहीं पता होगा। ये सवाल आपके मन आया भी होगा कि आखिर मौत पर दस्तखत करने के बाद जज ये पेन की निब क्यों तोड़ देता है तो इस सवाल का जवाब हम देते हैं कि वो ऐसा क्यों करते हैं।
हमारे कानून में फांसी की सजा सबसे बड़ी सजा है। क्योंकि इससे व्यक्ति का जीवन समाप्त हो जाता है, इसलिए जज सजा को मुकर्रर करने के बाद पेन की निब तोड़ देता है और उम्मीद की जाती है कि आगे से ऐसे जघन्य अपराध ना हों। साथ ही साथ इसका मतलब ये भी होता है कि एक व्यक्ति की जीवन लीला समाप्त होती है इसलिए जज इस सज़ा को मुकर्रर करने के बाद पेन की निब तोड़ देते हैं, ताकि उस पेन का इस्तेमाल दोबारा न हो सके।
सैद्धांतिक तौर पर, Death Sentence किसी भी जघन्य अपराध के मुकदमों के लिए समझौते का अंतिम एक्शन होता है, जिसे किसी भी अन्य प्रक्रिया द्वारा बदला नहीं जा सकता। जब फैसले में पेन से “Death” लिख दिया जाता है, तो इसी क्रम में पेन की निब को तोड़ दिया जाता है, ताकि इंसान के साथ-साथ पेन की भी मौत हो जाए।
अक्सर यह भी माना जाता है कि शायद फैसले से अपने आप को अलग रखने या फैसले को लेकर होने वाले प्रायश्चित या अपराधबोध को लेकर जज पेन की निब तोड़ देते हैं। एक बार फैसला लिख दिये जाने और निब तोड़ दिये जाने के बाद खुद जज को भी यह यह अधिकार नहीं होता कि उस जजमेंट की समीक्षा कर सके या उस फैसले को बदल सके या पुनर्विचार की कोशिश कर सके।
जिस उम्र में बच्चों के दूध के दांत टूटने लगते हैं उस उम्र में एक बच्चा अपने दांतों से परेशान है। 9 साल के इस बच्चे के मुंह में 32 नहीं बल्कि 300 दांत हैं। बचपन तक सब ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे दांतों के संख्या बढ़ने लगी। इस कदर बढ़ने लगी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। बढ़ते-बढ़ते बच्चे के मुंह में 300 दांत हो गए।
फिलीपिंस के जॉनक्रिस हाईपरडोंसिया नामक खतरनाक बिमारी से पीड़ित है। ये बहुत ही असमान्य बीमारी है। विश्व में 4 प्रतिशत लोग इस बीमारी से पीड़ित है। जॉन इस बीमारी की वजह से असहनीय पीड़ा से गुजरता है।
उसे बोलने में काफी तकलीफ होती है। वो सामान्य बच्चों की तरह सब कुछ नहीं खा पाता। उसे लगातार डॉक्टरों की निगरानी में रहना पड़ता है।
बपचन में उसके मुंह में सब कुछ सामान्य था। जॉन के 20 दांत थे, लेकिन धीरे-धीरे वो बढ़कर 50 हो गए। एक्स-रे हुआ तो पता चला कि मुंह में 150 दांत है, कुछ सालों में उसके मुंह में 300 से ज्यादा दांत निकल आए हैं। ऐसे में अब धीरे-धीरे सर्जरी की मदद से जॉन के मुंह से 40 दांत निकाले गए हैं। अभी उसके 7 और ऑपरेशन होने हैं।
ओमान की इस लड़की को माना जा रहा है दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला, क्या आप इससे सहमत हैं?

ओमान की इस लड़की को माना जा रहा है दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला, क्या आप इससे सहमत हैं?
इन्टरनेट पर आजकल एक महिला की फोटोज़ छाई हुई हैं. हर वेबसाइट पर उसकी ख़ूबसूरती के चर्चे हैं. फेसबुक से लेकर ट्विटर तक लोग उसकी फोटोज़ शेयर कर रहे हैं. दरअसल, उसकी फोटोज़ इन्टरनेट पर वायरल हो चुकी हैं. इन तस्वीरों में दिखने वाली लड़की को दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की बताया जा रहा है.
कई लोग उन्हें ओमान के सुल्तान कबूस बिन सईद के बेटे या पोते की पत्नी बताते हैं. कुछ न्यूज़ चैनल इस लड़की को सऊदी शेख अव्दी अल मोहम्मद की पत्नी भी बता रहे हैं, लेकिन यह सब एक झूठ है. सच्चाई हम आपको बताते हैं.
इस महिला का नाम शायमा अल हम्मादी है. वो फेमस टीवी होस्ट हैं और ओमान की रहने वाली है. वो शादीशुदा हैं और फ़िलहाल क़तर के स्टेट चैनल में एंकरिंग करती हैं. उन्होंने ओमान के सरकारी चैनल सल्तनत ऑफ़ ओमान टीवी पर सबसे पहले शो होस्ट किया था.
इसमें कोई शक़ नहीं कि शायमा बला की खूबसूरत हैं और उनकी फोटोज़ देखने के बाद उनसे नज़र ही नहीं हटती है. आइए आपको भी दिखाते हैं उनकी कुछ तस्वीरें.
अब आप खुद ही बताइए कि ये दुनिया की सबसे सुन्दर महिला है या नहीं.
प्राचीन भारत में भी होता था घड़ी का उपयोग. अथर्ववेद में है ‘घटिका यंत्र’ का वर्णन
अकसर ये माना जाता है कि प्राचीन भारत में जो धार्मिक मान्यताएं रही हैं, वही आज प्राय: किसी खोज या आविष्कार का प्रतिनिधित्व करती रही हैं. आज भी हम एक ऐसे ही प्राचीन आविष्कार की बात करेंगे, जिसका नाता आज के आविष्कार से है. भारत में जितने भी धर्म हैं, या यूं कहें कि जिन धर्मों का उद्भव स्थल भारत रहा है, उन सभी धर्मों में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए दिन और समय का काफ़ी महत्व होता है. लेकिन प्राचीन समय के लोगों के पास समय बताने का कोई विश्वसनीय तरीका नहीं था. माना जाता है कि उस समय धुप और छांव के आधार पर समय का अनुमान लगाया जाता था. इसको ही धूपघड़ी का नाम दिया गया. इन धूपघड़ियों का प्रचलन अत्यंत प्राचीन काल से होता आ रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि जब बादल न हो तो इस घड़ियों से आप समय का अनुमान कैसे लगाएंगे.
भले ही आपके पास इसका जवाब न हो, लेकिन हमारे पूर्वजों के पास इसका जवाब ज़रूर है. प्राचीन काल में हमारे भारतीय पूर्वजों ने एक विशेष और अलग तरह की घड़ी को इज़ाद किया था, जो पानी के ऊपर आधारित थी, जिसे घटिका यंत्र कहा गया.
प्राचीन भारतीयों ने दिन और रात को पहले 60 भागों में बांट दिया था, जिसे 'घड़ी' कहा गया. इसके अलावा, रात और दिन को चार भागों में बांट दिया, जिन्हें 'पहर' कहा गया.
दरअसल, पानी में समय देखने के लिए सभी महत्वपूर्ण शहरों में लोगों के समूह को नियुक्त किया गया था, जिन्हें घरियालिस कहा गया. इनका काम समय बताना होता था. वैसे जलघड़ी में दो पात्रों का प्रयोग होता था. एक पात्र में पानी भर कर उसकी तली में छेद कर दिया जाता था. उसमें से थोड़ा-थोड़ा जल नियंत्रित बूंदों के रूप में नीचे रखे हुए दूसरे पात्र में गिरता था. इस पात्र में एकत्र जल की मात्रा नाप कर समय का अनुमान लगाया जाता था और यही एक अवधि के निश्चित समय का संकेत देता था.
जल घड़ी को धूप घड़ी के साथ ही सबसे पुराना समय मापक यंत्र के रूप में माना जाता है. हालांकि जब इसका पहली बार आविष्कार हुआ, यह इतना महत्वपूर्ण हो जाएगा, इसके बारे में कोई नहीं जानता था.
आज से हजारों साल पहले कटोरे के आकार की ये घड़ी का सबसे सरल फॉर्म में जलघड़ी के रूप में भारत, चीन और मिश्र आदि देशों में अस्तित्व में आयी.
इतिहासकारों का सुझाव है कि मोहनजोदड़ो से खुदाई में मिले बर्तनों से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उस काल में जलघड़ी का प्रयोग किया गया होगा, क्योंकि खुदाई में मिले बर्तन के नीचे वाले भाग में एक पतला-सा छेद देखने को मिला है.
लगभग 2nd Millennium BCE से प्राचीन भारत में जल घड़ी का उपयोग किया जाता था, इसका उल्लेख अथर्ववेद में भी किया गया है.
7वीं शताब्दी के दौरान जब चीनी यात्री ने भारत का दौरा किया था, तब उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय में जलघड़ी कैसे काम करती है, इसका विवरण दिया था. जल घड़ी में पानी की मात्रा मौसम के अनुसार बदलती रहती है. इस घड़ी को विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स द्वारा संचालित किया गया था.
जलघड़ी का विवरण जो सूर्य सिद्धांत में दिया गया है, Astrologer Varahimira के Pancasiddhantika में उसका विस्तार से वर्णन किया गया है. गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त ने Brahmasphutasiddhanta में जो काम किया है, वो सूर्य सिद्धांत से काफ़ी मिलता-जुलता है